लखनऊ। रक्षाबंधन का पर्व बहन के भाई का प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन बहने अपनी भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं और बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करते हैं। यह पर्व जिम्मेदारी , भरोसे का प्रतीक है। पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। बता दें कि पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह में 9 बजकर 9 मिनट से और 28 तारीख में सुबह में 9 बजकर 49 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा। रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है. इस दिन सबसे पहले पूजा की थाली तैयार की जाती है, जिसमें राखी, रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और जल रखा जाता है. इसके बाद भगवान गणेश, माता लक्ष्मी का स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है. पूजा की शुरूआत में बहन अपने भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाती है और उसके माथे पर रोली व अक्षत का तिलक लगाती है। तिलक के बाद भाई की आरती उतारी जाती है तथा उसकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सफल जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है. इसके बाद बहन श्रद्धा और प्रेम के साथ भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुख, समृद्धि तथा सुरक्षा की कामना करती है. राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देती है. वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा करने और किसी भी हालात में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।
रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त
रक्षा बंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त देखना बेहद जरूरी माना जाता है. इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 10 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. ऐसे में सभी बहनें 03 घंटे 37 मिनट की अवधि में राखी बांध सकती हैं।
इस समय रहेगा राहुकाल
28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. ऐसे में इस अवधि में किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य न करें.
रक्षा बंधन की विधि
सबसे पहले एक थाली लीजिए उसमें रोली, अक्षत, राखी, मिठाई और दीपक रखें। अब आप भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। इसके बाद भाई की आरती करें और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करें। अंत में भाई को मिठाई खिलाएं। रक्षाबंधन के दिन बहन सबसे पहले देवी देवताओं की पूजा करें। इसके बाद अपने इष्ट देव को राखी अर्पित करें। फिर भगवान से अपने भाई की लंबी आयु की कामना करें। इसके बाद अपने भाई की हथेली पर कलावा बांधे। राखी बांधने से पहले अपने भाई को तिलक करें फिर अक्षत लगाएं। इसके बाद भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे और उनकी लंबी आयु की कामना करें। रक्षा बंधन के दिन बहन और भाई दोनों को ही काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। न ही क्रोध और एक दूसरे को अपशब्द कहने चाहिए।
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ख्याल
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए। बहने तिलक लगाकर भाई की आरती जरूर उतारें। भाई को राखी बंधवाने के बाद अपनी बहन को उपहार जरुर दें।
रक्षाबंधन का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले रक्षा सूत्र देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधा था। रक्षाबंधन का संबंध महाभारत काल से भी मिलता है। द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई पर राखी बांधी थी। भगवान कृष्ण ने भी अपने भाई का फर्ज निभाने के लिए द्रौपदी की लाज बचाने के लिए पहुंच गए थे।





