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श्रमिकों को कृषि आधारित उद्योगों में रोजगार उपलब्ध करायें : शाही

-राज्य स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2020 का आयोजन

लखनऊ। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक बीमारी कोविड-19 के संक्रमण के कारण विदेश व अन्य राज्यों से गांवों में आये श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर कृषि व कृषि आधारित उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराये जायं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के संक्रमण व लॉकडाउन में जहां सभी कल-कारखाने व उद्योगों को बन्द रखा गया वहीं किसानों को साग-सब्जी, दूध व अन्य उत्पादों को बेचने की छूट दी गयी, जिससे सप्लाई चेन अनवरत बनी रहे।

राज्य स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2020 का आयोजन मंगलवार को कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा की अध्यक्षता में एनआईसी सेन्टर योजना भवन लखनऊ में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस गोष्ठी में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कृषि मंत्री ने कहा कि आगामी खरीफ 2020 में मानसून के सामान्य रहने की सम्भावना है।

समय से वर्षा प्रारम्भ हो जाने पर कोविड-19 के प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए एवं खरीफ फसलों की बुवाई-रोपाई समय से कर ली जाये। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन का लक्ष्य 235.15 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। कृषकों की आर्थिक उन्नति एवं सम्पन्नता सुनिश्चित करते हुए कृषकों की आय दुगनी करने के संकल्प के लिये प्रसार, सिंचाई एवं जल प्रबन्ध, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता, बीज प्रबन्धन, विपणन, मशीनीकरण एवं शोध तथा कृषि विविधीकरण पर विशेष बल दिया जाय।

शाही ने कहा कि संकर प्रजाति के बीजों विशेषकर धान, मक्का, बाजरा आदि के प्रयोग को भी प्रोत्साहित किया जाय, ताकि अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। बाढ़ प्रभावित, जलमग्न क्षेत्रों में धान की स्वर्णा सब-1, सांभा सब-1, उन्नत सांभा महसूरी, बीना-11 आदि प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाये। नवीनतम कृषि तकनीक का उपयोग करते हुए बिलम्ब से धान की रोपाई वाले क्षेत्रों में 15 दिन अग्रिम रोपाई की रणनीति तैयार कर क्रियान्वित किया जाये। भारत सरकार को आयातित एवं स्वयं उत्पादित उर्वरकों पर उनके मूल्य से 4.5 गुना अधिक अनुदान देना पड़ रहा है। इसलिये संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया जाये।

कृषि मंत्री ने कहा कि सभी पात्र कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराकर ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये तथा फसल बीमा से आच्छादित कराया जाय, ताकि विपरीत मौसम एवं दैवी आपदा की स्थिति में उन्हें फसल बीमा का लाभ मिल सके। होर्डिंग, प्रिन्ट, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं पम्पलेट के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाय। दलहन एवं तिलहन (बुन्देलखण्ड में तिल) की खेती पर विशेष जोर दिया जाय।

खेती के साथ-साथ पशुधन का विशेष महत्व होता है, जहां एक ओर पशुधन से दूध तथा अन्य उपयोगी खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं वहीं पर पशुपालन से भारी मात्रा में गोबर जीवांश खाद के रूप में प्राप्त होता है, जो मृदा स्वास्थ्य का मूल आधार है और पशुओं के लिये हरा चारा उत्पादन पर विशेष बल दिया जाये। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसान को खुशहाल व उसकी आमदनी बढ़ाना है, उपज को बाजार तक लाना आज की आवश्यकता है।

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