विदेशी मीडिया ने चंद्रयान-3 की सफलता को प्रमुख जगह देते हुए भारत और पीएम मोदी पर लिखा है
भारत के चंद्रयान-3 के लैंडर ने सफलतापूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव में सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है. भारतीय मीडिया के साथ साथ विदेशी मीडिया में भी भारत की इस उपलब्धि की चर्चा है.
‘मज़बूत छवि और मज़बूती का संकेत’ – न्यू यॉर्क टाइम्स ने भारत के चंद्रयान-3 को स्पेस अनुसंधान में एक नया अध्याय बताया है. इसी लेख को जापान टाइम्स ने भी छापा है. भारतीय नेता एक ऐसे बहुध्रुवीय वैश्विक ऑर्डर के पक्ष में बात करते रहे हैं, जिसमें भारत की अहम भूमिका होगी. “दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश की सरकार एक तरफ़ लोगों की आम ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है तो दूसरी तरफ़ देश की मोदी सरकार का संदेश स्पष्ट है- नेतृत्व की भूमिका भारत लेगा तो दुनिया एक न्यायपूर्ण जगह होगी.”
वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मज़बूत करना उसके अभियान के प्रमुख संदेश में से एक है. आर्थिक, कूटनीतिक और तकनीकी क्षेत्र में विकास को मोदी अपनी छवि के साथ जोड़ कर दिखाते रहे हैं.” 2014 में मंगल मिशन के दौरान, 2019 में चंद्रयान-2 की लैंडिंग के वक़्त मोदी ख़ुद इसरो के मिशन कंट्रोल रूम में मौजूद थे, लेकिन चंद्रयान-3 की लैंडिंग के वक़्त वो ब्रिक्स के सम्मेलन के लिए जोहानिसबर्ग में थे. बेंगलुरु में मौजूद कंट्रोल रूम में उनका चेहरा वीडियो लिंक के ज़रिए स्क्रीन पर दिखा.
चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर अलग-अलग समुदायों के बीच भेदभाव मिटता हुआ दिखा. मिशन की सफलता के लिए मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में प्रार्थना सभाएं की गईं.
वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा कि भारत की ये कामयाबी भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतीक भी है. उन्होंने रूस के लूना-25 की नाकामी का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये लैंडर चांद की सतह की तरफ़ ऐसे बढ़ा जैसे रूस के ताबूत की आख़िरी कील की तरफ़ हथौड़ा बढ़ा रहा हो.
ब्रितानी अख़बार द गार्डियन छापा है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडर उतारकर भारत ने वो कारनामा कर दिखाया है जो अब तक कोई नहीं कर पाया है. इसके साथ ही भारत अब एक स्पेस पावर बन गया है. जैसे-जैसे चंद्रयान के चांद पर उतरने की तारीख़ नज़दीक आ रही थी लोगों में इसे ले कर घबराहट बढ़ रही थी. इसकी सफलता के लिए मंदिरों और मस्जिदों में ख़ास प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं. वाराणसी में गंगा किनारे साधुओं ने मिशन की सफलता की कामना की.
बुधवार की शाम क़रीब 6 बजे लैंडिंग हुई और उसके बाद भारत के लोग चांद पर सफलतापूर्वक लैंड करने वाला चौथा देश बनने की और चांद के दक्षिणी ध्रुव में लैंड उतरने वाला पहला देश बनने का जश्न मना रहे थे.”आख़िरी के कुछ पलों में लैंडर ने बेहद जटिल काम को अंजाम दिया. इसने अपनी स्पीड 3,730 मील प्रतिघंटे से कम कर लगभग शून्य मील प्रतिघंटे कर दी. साथ ही इसने अपनी पोज़िशन बदली और उतरने की तैयारी के लिए सीधी यानी वर्टिकल पोज़िशन ली.”
“इस वक्त लैंडर को सही पोज़िशन में सही धक्का दिए जाने की ज़रूरत थी क्योंकि ज़ोर से धक्का देने से इसके लड़खड़ा जाने की ख़तरा था. वहीं ज़रूरत से कम ताक़त से धक्का देने पर ये चांद पर ग़लत जगह पर उतर सकता था.” इससे पहले 2019 में भेजे गए भारत के चंद्रयान-2 मिशन की नाकामी की वजह आख़िरी के कुछ पल थे. इसका लैंडर अपनी स्थिति बदलने में कामयाब नहीं हो सका था और तेज़ी से चांद की तरफ आ गया था.
लैंडिंग, मगर स्टाइल में द इकोनॉमिस्ट ने भी जगह दी है. अख़बार लिखता है कि भारत का लैंडर न केवल चांद पर उतरा बल्कि उसने ये कारनामा स्टाइल के साथ किया. इस महत्वपूर्ण घटना को भारत में ऐसी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है, जो केवल कुछ ही महान देश कर सकते हैं और ये विश्व मंच पर एक नेता के तौर पर उसकी छवि को मज़बूत करता है. देश में अगले साल चुनाव हैं और मोदी के राष्ट्रवादी संदेश में ये छवि फिट बैठती है.





