श्रीनगर/नई दिल्ली। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बीच जंतर-मंतर बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को पीडीपी प्रमुख पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि उन्होंने स्पष्ट रूप से माफी शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। उमर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि अफसोस जताने और माफी मांगने में जमीन-आसमान का फर्क होता है। उन्होंने कहा,क्या उन्होंने माफी मांगी? क्या माफी शब्द का इस्तेमाल किया? नहीं किया, तो फिर माफी कहां है?उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘अगर’ शब्द जोड़कर कही गई बात असल माफी नहीं मानी जा सकती।मुख्यमंत्री ने पीडीपी विधायक वहीद पारा पर भी निशाना साधा, जिन्होंने विवादित वीडियो को एआई से बना बताया था। अब्दुल्ला ने कहा कि पांच दिनों तक इसे दबाने और गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जबकि बाद में खुद महबूबा ने साफ किया कि वीडियो असली है।
महबूबा ने मांगी माफी, दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को माफी मांगते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने कहा, अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं दिल से माफी मांगती हूं।महबूबा ने स्पष्ट किया कि उनका आशय यह था कि कश्मीर में आतंकवाद की वजह से सुरक्षा बलों को बल प्रयोग का बहाना मिल जाता है, लेकिन उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने यह भी माना कि बयान का वीडियो असली है और उसमें किसी तरह की एआई छेड़छाड़ नहीं हुई।
जंतर-मंतर से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब महबूबा मुफ्ती 23 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन उनके बयान से यह संकेत मिला कि उन्होंने कश्मीर में पहले हुए पैलेट गन इस्तेमाल का बचाव किया है।इसी बयान को लेकर उनकी आलोचना शुरू हुई और सियासी बयानबाजी तेज हो गई।महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया। वहीं, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे बयान आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने से हतोत्साहित करते हैं।उन्होंने कहा, जब नेता ही दमन का समर्थन करेंगे, तो जनता उनके साथ क्यों खड़ी होगी?
इस पूरे मामले ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई गर्माहट ला दी है। एक तरफ उमर अब्दुल्ला माफी की मांग पर अड़े हैं, वहीं महबूबा मुफ्ती इसे गलतफहमी और बयान की गलत व्याख्या बता रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में दोनों दलों के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है।





