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विपक्ष को लोकतंत्र और जनता की नहीं, सिर्फ गठबंधन की चिंता, लेकिन 2024 में मोदी ही आएंगे : शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सेवा विधेयक का विरोध करने पर विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इन दलों को न तो लोकतंत्र की चिंता है, न देश की और न ही जनता की चिंता है बल्कि इन्हें सिर्फ अपने गठबंधन की चिंता है लेकिन ये कितने ही गठजोड़ बना लें, 2024 में नरेन्द्र मोदी ही आएंगे।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023 पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, पिछले कुछ दिनों में सदन में नौ विधेयक पारित हुए लेकिन विपक्षी दल इसमें शामिल नहीं हुए। वे सभी विधेयक भी महत्वपूर्ण थे। लेकिन आज के विधेयक (दिल्ली सेवा विधेयक) पर सभी (विपक्षी दल) मौजूद हैं क्योंकि सवाल गठबंधन बचाने का है। गृह मंत्री ने कहा, आज भारत आपके (विपक्ष) दोहरे चरित्र को देख है और देखना भी चाहिए। इनके गठबंधन से एक छोटी सी पार्टी भागकर नहीं चली जाए, इनके लिए इसका बड़ा महत्व है। शाह ने कहा, इनको (विपक्षी दलों को) न ही लोकतंत्र की चिंता है, न देश की चिंता है और न जनता की चिंता है, इन लोगों को सिर्फ अपने गठबंधन की चिंता है, इसलिए ये सारे लोग यहां आए हैं। उन्होंने कहा, विपक्ष का यह गठबंधन सत्ता के स्वार्थ के लिए बना है। कितने ही गठबंधन कर लो, 2024 में आएंगे मोदी ही। मणिपुर के विषय पर गृह मंत्री ने कहा, मैं पहले ही दिन से यहां कह रहा हूं, जितनी भी लंबी चर्चा आपको करनी हो, मणिपुर पर सरकार चर्चा करने के लिए तैयार है। हर चीज का जवाब दिया जाएगा और मैं जवाब दूंगा।

शाह ने कहा, दिल्ली न तो पूर्ण राज्य है, न ही पूर्ण संघ शासित प्रदेश है। राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते संविधान के अनुच्छेद 239 ए ए में इसके लिए एक विशेष प्रावधान है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 239 ए ए के तहत इस संसद को दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र या इससे संबंधित किसी भी विषय पर कानून बनाने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। शाह ने कहा कि कुछ सदस्यों ने कहा कि इस विधेयक को उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करके लाया गया है, लेकिन वह उन सदस्यों से कहना चाहते हैं कि न्यायालय के फैसले के मनपसंद हिस्से की बजाए पूरा संदर्भ दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले में पैरा 86, पैरा 95 और पैरा 164 (एफ) में स्पष्ट किया गया है कि अनुच्छेद 239 ए ए में संसद को दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के विषय पर कानून बनाने का अधिकार है। दिल्ली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति ने दिल्ली को राज्य स्तर का दर्जा देने की सिफारिश की थी। गृह मंत्री ने कहा कि जब यह सिफारिश संविधान सभा के समक्ष आई तो पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी (राजगोपालाचारी), डॉ राजेन्द्र प्रसाद और बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं ने इसका विरोध किया था और कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का कहना था कि जहां तक दिल्ली का सवाल है, उन्हें ऐसा लगता है कि भारत की राजधानी के रूप में शायद ही किसी स्थानीय प्रशासन को मुक्त अधिकार यहां दिए जा सकते हैं।

शाह के अनुसार, पंडित नेहरू ने चर्चा के दौरान कहा था कि 2 साल पहले सदन ने सीतारमैया समिति की नियुक्ति की थी और अब जब रिपोर्ट आई है तो दुनिया, भारत और दिल्ली बदल चुकी है। इसलिए दिल्ली में हुए इन परिवर्तनों को देखते हुए उस समिति की सिफारिशों को स्वीकार नहीं कर सकते और इसे स्वीकार करना वास्तविकता से पूरी तरह मुंह मोड़ लेना होगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक को स्वीकृति दी थी। यह 19 मई को केंद्र द्वारा लाये गये अध्यादेश की जगह लेगा। केंद्र सरकार 19 मई को अध्यादेश लाई थी। इससे एक सप्ताह पहले उच्चतम न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को सेवा से जुड़े मामलों का नियंत्रण प्रदान कर दिया था, हालांकि उसे पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से जुड़े विषय नहीं दिये गए। शीर्ष अदालत के 11 मई के फैसले से पहले दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती उपराज्यपाल के कार्यकारी नियंत्रण में थे।

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