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ओली की गलत बोली

भारत के साथ रिश्ते बिगाड़ने के लिए नेपाल के पीएम के. पी. शर्मा ओली किस हद तक गिरेंगे यह कहना भी मुश्किल है लेकिन फरवरी 2018 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही ओली ने एक के बाद एक अनेक ऐसे फैसले किये हैं जिससे चीन उन पर मेहरबान रहे और भारत के साथ संबंध बिगड़ जायें।

भारत-नेपाल के रिश्ते सदियों पुराने हैं। रोटी-बेटी, सांस्कृतिक, धार्मिक, रोजी-रोजगार और इससे भी बढ़कर दिलों का यह रिश्ता इतना मजबूत है कि इसे कूटनीतिक परिभाषाओं से नहीं समझा जा सकता है। इसलिए ओली चाहे जितने बेतुके बयान दें, चाहे जितनी बाधाएं खड़ी करें वे रिश्तों की मजबूत डोर को कभी कमजोर नहीं कर पायेंगे। बेतुकी बयानबाजी और ऊल-जलूल फैसले करके भी वे न तो भारत के साथ दिली रिश्तों को तोड़ पायेंगे और न ही अधिक दिनों तक कुर्सी बचा पायेंगे।

लेकिन इन हरकतों से ओली बड़ी चतुराई से नेपाल में भारत विरोधियों को खुश करने, चीन के प्रति वफादारी निभाने और नेपाल में विमर्श की दिशा मोड़ने में सफल हो रहे हैं जिससे चीन के हनी-मनी ट्रैप में गहरे तक फंसे ओली के कुकर्मों पर चर्चा न हो और नेपाली जनता भारत-नेपाल संबंधों में हो रहे कूटनीतिक उतार-चढ़ाव में उलझी रहे। सामान्य ज्ञान की किताबों में बताया जाता था कि नेपाल एक ऐसा देश है जो कभी गुलाम नहीं हुआ। ले

किन ओली ने जिस तरह नेपाल की संप्रभुता को चीन की झोली में डाल दिया है, चीन के हाथों नेपाल अपनी जमीन गंवा रहा है और नेपाल में राजनीतिक फैसले चीन की राजदूत कर रही है उससे स्पष्ट है कि अब नेपाल की संप्रभुता चीन में समाहित हो गयी है। ओली पर चीन के हनी एवं मनी ट्रैप में फंसने और नेपाल को चीन के कर्ज जाल में फंसाने का आरोप लग रहा है। चीन छोटे-छोटे देशों के भ्रष्ट नेताओं को घूस देकर फंसाता है और फिर उनसे मनमानी फैसले कराता है।

पाकिस्तान, मालदीव, श्रीलंका और अफ्रीकी देशों में चीन ऐसा कर चुका है। चीन ने ओली को घूस के रूप में मोटी रकम देकर कई विदेशी कंपनियों में निवेश कराया है और अपने राजदूत के जरिए चीन नेपाल में सांसदों की खरीद फरोख्त कर ओली की सरकार चलाता है। कहा तो यहां तक जाता है कि ओली चीनी राजदूत के हनीट्रैप में हैं। ओली पर नेपाल को चीन का पिट्ठू बनाने, चीन से रिश्वत लेने, हनी ट्रैप में होने जैसे तमाम आरोप लग रहे हैं।

इससे नेपाली जनता का ध्यान भटकाने के लिए ही ओली ऐसे बेतुके बयान दे रहे हैं। ओली ने कुछ दिन पहले भारत पर कोरोना फैलाने और उनकी सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया था। अब उन्होंने अयोध्या पर अपने दिव्य ज्ञान का प्रदर्शन कर खुलासा किया है कि नेपाल में अयोध्या नाम का एक गांव है जहां श्रीराम पैदा हुए थे। श्रीराम इस जगत के सृजनकर्ता हैं और कण-कण में बसते हैं।

इसलिए ओली, प्रत्येक नेपाली और दुनिया भर के लोगों को श्रीराम को अपना मानने का हक है। राम पूरी दुनिया के आराध्य हैं। अगर श्रीराम के आदर्शों को और राज व्यवस्था को दुनिया अपना ले तो सारे विवाद ही खत्म हो जायें। जहां तक अयोध्या पर ओली के विवादित बयान की बात है तो इस पर कोई भरोसा नहीं करता है। हां ऐसे बेतुके बयान से जनमानस आहत होता है जिसमें भारतीय, नेपाली और पूरी दुनिया के लोग शमिल हैं।

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