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सुरक्षा, सम्मान के साथ स्वावलम्बन के लिए किये जा रहे हैं लगातार प्रयास
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सफलता महिलाओं के सहयोग व जागरूकता से ही मिलेगी
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मिशन शक्ति के तहत मुख्यमंत्री ने किया महिला प्रतिनिधियों से संवाद
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि बदलते दौर में एक बार फिर ‘गांव की बेटी सबकी बेटी’ के भाव को जगाने की जरूरत है। यह हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। गांव से लेकर महानगरों तक इसकी गूंज होनी चाहिए। उन्होंने कहा है महिला सुरक्षा व सम्मान को सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वावलंबन के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है, पर मुकम्मल सफलता महिलाओं के सहयोग और जागरूकता से ही मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री ‘मिशन शक्ति’ के दूसरे दिन अपने सरकारी आवास पर महिला जनप्रतिनिधियों (प्रधानों, बीडीसी सदस्यों, ब्लाॅक प्रमुखों तथा पार्षदों, नगरीय निकायों की अध्यक्षों) स्वयं सेवी संगठनों, महिला शिक्षकों से वर्चुअल माध्यम से संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों के प्रगतिशील और सकारात्मक सोच व प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की जागरूकता ने कई क्षेत्रों का कायाकल्प किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए सरकारों का प्रयास तभी सफल होगा, जब खुद महिलाएं जागरूक होंगी। उन्होंने कहा कि आप जैसे जागरूक लोगों के जरिये ही शासन की योजनाएं पात्र व्यक्तियों तक पहुंचती हैं। अगर जनप्रतिनिधि जागरूक न हो तो यह योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ कर दम तोड़ देती हैं।
योगी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया है। एक पढ़ी लिखी बेटी, सुरक्षित भी होती है, सम्मानित भी होती है और स्वावलंबी भी होती है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने कोख में बेटियों की हत्या रोकने और बाल विवाह की कुरीति समाप्त करने के लिए मुखबिर योजना शुरू की थी। स्वच्छ भारत अभियान, स्वस्थ बनने का अभियान तो है ही, साथ ही साथ नारी गरिमा और सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसेफेलाइटिस जैसी महामारी की समाप्ति का कारण यही स्वच्छ भारत अभियान है। स्कूल चलो अभियान और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जो प्रयास हुए, उनसे 50 लाख से अधिक बच्चे विद्यालय में बढ़े। सुखद यह है कि इनमें ज़्यादातर बालिकाएं हैं। इसी तरह मातृ वंदना, सौभाग्य योजना, उज्ज्वला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना जैसे प्रयासों ने महिलाओं के जीवन में एक नया सवेरा किया है। उन्होंने कहा कि पीएम जनधन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को वित्तीय समावेशन से जोड़ा।





