कई सदस्यों ने सदन के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत देने की मांग की
विशेष संवाददाता लखनऊ। यूपी में विधानसभा का शीतकालीन सत्र 28 नंबर से शुरू हो रहा है। इस सत्र में नए नियम के अनुसार सदन की कार्यवाही चलेगी। यह नई नियमावली पिछले सत्र में ही सदन में लाई गई थी। लेकिन अब नई नियमावली को लेकर विधायकों की तरफ से आवाज उठनी शुरू हो गई है। कई सदस्यों ने सदन के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत देने की मांग की है।
सदन में मोबाइल ले जाने पर रोक सदन में मोबाइल फोन पर रोक यूपी विधान सभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों-2023 का हिस्सा है जिसे राज्य विधानसभा ने मानसून सत्र (अगस्त 2023 में) के दौरान अपनाया था। इसके अलावा भी सदन के भीतर प्रदर्शन को लेकर भी कई तरह के नियम बनाए गए थे। हालांकि फिलहाल, राज्य विधान सभा ने अभी तक विधान सभा कक्ष के बाहर मोबाइल फोन को सुरक्षित जमा करने की कोई व्यवस्था नहीं की है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा, कि हां सदन की नई नियमावली अब लागू की जाएगी और सदन का शीतकालीन सत्र नए नियमों के प्रावधानों के तहत आयोजित किया जाएगा। नए नियम सदस्यों को सदन के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए हुई थी पहल हालांकि नए नियम नियम लागू करने के पीछे दलील ये है कि सदन में अनुशासन लागू करने के लिए पेश किए गए हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी के एक सदस्य को फेसबुक लाइव पर सदन की कार्यवाही का प्रसारण करते हुए पाया गया, जिससे स्पीकर सतीश महाना को गुस्सा आ गया और उन्होंने विधायक को तुरंत सदन छोड़ने के लिए कहा था।
शर्तों के साथ मोबाइल ले जाने की मिले अनुमति सदस्यों को सदन में अपने मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति देने की मांग को उचित ठहराते हुए समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडे ने कहा, कि ‘हम सदन के अंदर अपने मोबाइल फोन को साइलेंट मोड में रखते हैं। हम स्पीकर से अनुरोध करेंगे कि वह मोबाइलों को साइलेंट मोड में रहने दें। हम अपने फोन को अलग कैसे रख सकते हैं। निर्वाचन क्षेत्र के लोग हमेश काल करते रहते हैं और उनकी समस्याओं को सुनना जरूरी होता है।
’ पांडेय कहते हैं कि, अगर हमारे निर्वाचन क्षेत्र में किसी व्यक्ति को तत्काल ध्यान देने या अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता है, तो हमें लोगों की मदद करनी होगी। हम स्पीकर से अनुरोध करेंगे कि या तो सदन के अंदर मोबाइल फोन की अनुमति दी जाए या जब सदन चल रहा हो तो मोबाइल फोन पर ध्यान देने के लिए एक निजी सचिव उपलब्ध कराया जाए। ऐसे निजी सचिव को सदस्यों को किसी भी जरूरी कॉल के बारे में सूचित करने के लिए सदन में प्रवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
कांग्रेस भी इस बैन के खिलाफ करेगी अपील कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि पहले भी सदन के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, हम अध्यक्ष से कुछ शर्तों के साथ मोबाइल को अनुमति देने का अनुरोध करेंगे। यह आवश्यक है क्योंकि एक जन प्रतिनिधि को किसी भी आपात स्थिति में लोगों के लिए सुलभ रहना चाहिए। गौरतलब है कि कुछ अन्य विधायक भी अपनी समस्याएं बताकर इस नियम का विरोध कर चुके हैं।
नए नियमों के मुताबिक सदन में कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। करीब 65 साल बाद नई नियमावली पर काम किया गया है। सदन की कार्यवाही को कागज रहित बनाने के लिए राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (एनईवीए) को लागू करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के बाद बदलाव आवश्यक हो गया है।





