लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना को उनके उत्कृष्ट सार्वजनिक जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण तथा विधानमंडलीय कार्यप्रणाली में नवाचारपूर्ण योगदान के लिए मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ की ओर से डॉक्टर आॅफ लेटर्स (डी.लिट्), मानद की उपाधि से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय ने उनके दूरदर्शी नेतृत्व और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने में दिए गए योगदान की सराहना करते हुए यह सम्मान प्रदान किया।
जारी प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि श्री महाना ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। उनके नेतृत्व में ई-विधान प्रणाली का सफल क्रियान्वयन हुआ, जिसके माध्यम से विधानसभा को कागजरहित और तकनीक आधारित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया गया। इस पहल से कार्यकुशलता बढ़ी है, पारदर्शिता को बल मिला है और विधानसभा की कार्यवाही तक डिजिटल माध्यम से व्यापक पहुँच सुनिश्चित हुई है। इसके अतिरिक्त श्री महाना ने विधायकों की विशेषज्ञता के आधार पर उनके बेहतर उपयोग, महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रोत्साहन तथा क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे कई नवाचारपूर्ण कदम उठाए हैं। समन्वय सेतु जैसे मंचों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की पहल भी की गई है।
श्री महाना के नेतृत्व और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिली है। उन्हें वर्ष 2025 में भारतीय छात्र संसद की ओर से आइडियल लेजिस्लेटिव असेंबली स्पीकर अवॉर्ड तथा वर्ष 2024 में अटल सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। मंगलायतन विश्वविद्यालय ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, संसदीय परंपराओं को सुदृढ़ करने के प्रयास और प्रेरणादायी नेतृत्व भावी पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हैं। इसी के दृष्टिगत विश्वविद्यालय ने उन्हें यह मानद उपाधि प्रदान की है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलाधिपति डा. अच्युतानंद मिश्रा ने की। समारोह में कुलपति प्रो. पीके दशोरा तथा कुलसचिव ब्रिगेडियर डा. समरवीर सिंह तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।





