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सबको रूलाता प्याज

प्याज एक ऐसा कृषि उत्पाद बन चुका है जो कभी सामान्य नहीं रहता है। इसके भाव या तो इतने अधिक हो जाते हैं कि गरीबों को दाल में तड़का लगाना मुश्किल हो जाता है और कभी इतने गिर जाते हैं कि किसानों को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कुल मिलाकर या तो प्याज का उपयोग करने वाला उपभोक्ता रोता है या फिर उत्पादक किसान। यह स्थिति दरअसल इसके भण्डारण एवं प्रोसेसिंग सुविधाओं की कमी और बाजार में व्याप्त अराजकता का परिणाम है।

अगर प्याज का उत्पादन अधिक होता है तो इसका प्रसंस्करण होना चाहिए ताकि बाजार का भाव गिरने न पाये। जब बाजार में आपूर्ति कम हो तो प्रसंस्करण या भंडारण से निकालकर बाजार में डाल दिया जाये जिससे उपभोक्ता को परेशान न होना पड़े। कुल मिलाकर आज जो प्याज उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं की दशा है उसके पीछे सरकार की अस्थिर नीतियां, सुविधाओं की कमी के साथ देश की जनता भी जिम्मेदार है।

जब प्याज के दाम बढ़ जाते हैं तो राजनीतिक पार्टियां और जनता भी तमाशा खड़ी कर देती है। प्याज-प्याज चिल्लाकर अंतत: सरकार को निर्यात रोकने, आयात बढ़ाने जैसे उपायों पर विवश कर देती है। इससे यह होता है कि भारतीय प्याज का बाजार विदेशों में खत्म हो जाता है।

जब मांग होती है तब निर्यात रोक दिया जाता है और उत्पादन अधिक होता है तो बाजार खत्म हो चुका है। यह स्थिति देश के लिए चिंताजनक है। आज भले ही कोई फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत कवरेज में न हो लेकिन उनके उत्पादन पर किसानों को खर्च तो करना ही पड़ता है। इसलिए सरकार को जब बाजार भाव कम हो तो एक न्यूनतम विडों देना चाहिए जिस पर बेचकर किसान नफा न कमा सकें तो भी कम से कम पूंजी तो निकाल ही सकें।

यह भी कि देश को कुछ राशन पर भी खर्च करना चाहिए। लोग महंगी से महंगी गाड़ियों से चल लेते हैं। लग्जरियस उपभोग करते हैं लेकिन जब आटा-दाल पर खर्च करने की बात आती है तो अचानक सब गरीब हो जाते हैं। जो लोग गरीब हैं सरकार उनको सस्ते दर पर अनाज दे, लेकिन कम से कम जो बाजार में रेट हो वह मुनाफे वाला होना चाहिए। कोई भी उद्यम घाटे में नहीं चल सकता है।

अगर किसानों को लगातार घाटा होगा तो वे खेती से अलग हो जायेंगे और देश पर संकट आ जायेगा। इसी तरह किसी चीज का भाव लगातार ऊंचा होगा तो लोग उसको उपभोग छोड़ देंगे। कुल मिलाकर प्याज न तो सस्ता ठीक है और ही महंगा। इसके दाम 20-30 रुपये प्रति किलो के आसपास होना चाहिए जिससे उपभोक्ता और उत्पादक दोनों विन-विन स्थिति में रहेंगे। प्याज के जो दाम आज चल रहे हैं वह सरकार के कुप्रबंधन एवं प्राकृतिक आपदा का नतीजा है।

ऐसे समय में लोगों को धैर्य से काम लेना चाहिए। 200 या डेढ़ सौ रुपये किलो प्याज होना कोई भाव नहीं है। इस भाव पर प्याज लेने के बजाय लोगों को वैकल्पिक उपाय पर सोचना चाहिए। जब प्याज की आपूर्ति सामान्य हो जायेगी तो फिर इसके भाव भी सामान्य हो जायेंगे।

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