नई दिल्ली। लोकसभा ने ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ को वॉइस वोट से पारित कर दिया। इस बिल के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, इनकम टैक्स एक्ट, 2025 और फाइनेंस एक्ट, 2026 में संशोधन किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक निवेश, विनिर्माण और कारोबार के लिए अधिक आकर्षक बनाना तथा डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए टिकाऊ ढांचा तैयार करना है।बिल विपक्ष के विरोध और सदन में शोर-शराबे के बीच बिना विस्तृत चर्चा के पारित हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे लोकसभा में पेश करते हुए कहा कि इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
UPI और RuPay पर क्या बदलेगा?
बिल का सबसे अहम प्रावधान UPI और RuPay कार्ड भुगतान से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में इन माध्यमों से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लिया जाता। नए संशोधन के बाद सरकार को यह कानूनी अधिकार मिलेगा कि वह भविष्य में अधिसूचना जारी कर तय कर सके कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर शुल्क लागू होगा और किन्हें छूट मिलेगी।हालांकि, बिल में अभी कोई MDR या नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। यह केवल सरकार को भविष्य में ज़ीरो-MDR व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी आधार प्रदान करता है।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मिलेगा सहारा
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए राजस्व का एक स्थायी मॉडल तैयार किया जा सकेगा। साथ ही, ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर न्यूनतम बोझ रखते हुए डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
विदेशी निवेश को बढ़ावा
बिल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर टैक्स राहत से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, वैश्विक फंड मैनेजरों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना आसान बनाने और उनकी वैश्विक आय पर अनावश्यक कराधान से राहत देने का प्रस्ताव है।
REITs और InvITs निवेशकों को राहत
संशोधन के तहत REITs और InvITs में निवेश करने वालों के लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। यदि ऑपरेटिंग कंपनियां नई टैक्स व्यवस्था अपनाती हैं, तब भी निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड टैक्स-फ्री बनाए रखने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
डेटा सेंटर सेक्टर के लिए आसान नियम
बिल में डेटा सेंटर उद्योग के लिए नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है। विदेशी क्लाउड कंपनियों को भारतीय डेटा सेंटरों का उपयोग करने में मंजूरी संबंधी कई शर्तों से राहत दी जाएगी। साथ ही, डेटा सेंटरों को सीधे स्वामित्व के बजाय लीज मॉडल पर संचालित करने की अनुमति भी मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत में बड़े AI और क्लाउड डेटा सेंटर निवेश आकर्षित होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा समर्थन
बिल के तहत उन विदेशी कंपनियों को भी कर राहत देने का प्रस्ताव है, जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए मशीनरी, उपकरण और कंपोनेंट्स की आपूर्ति करती हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से कुछ टैक्स छूट की अवधि भी बढ़ाई गई है।
हीरा कारोबार को बढ़ावा
सरकार ने वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए विदेशी हीरा माइनर्स और उनसे जुड़े कारोबारियों को विशेष टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा है। यह छूट मुंबई और सूरत के विशेष जोन में रफ डायमंड के व्यापार से होने वाली आय पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक हीरा व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है।सरकार के अनुसार, यह संशोधन डिजिटल भुगतान, विदेशी निवेश, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सुधारों को गति देगा। साथ ही, भारत को वैश्विक पूंजी और निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद गंतव्य बनाने में मदद मिलेगी।





