लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने ‘संगीत मिलन’ और ‘भातखंडे एलुमनाई एसोसिएशन’ के साथ मिलकर यह आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन रामकृष्ण मिशन के स्वामी मुक्तिनाथानंदजी ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को एक भावपूर्ण भाषण दिया और कहा कि आज के अशांत समय में, ईश्वर तक पहुँचने का एकमात्र तरीका संगीत में खुद को लीन करना है। संगीत ही आंतरिक शांति पाने का जरिया है।
पहले दिन इंस्ट्रूमेंटल (वाद्य संगीत) में 7 प्रतिभागी शामिल हुए, जबकि वोकल (गायन) में ख्याल और ध्रुपद के लिए 26 और ठुमरी के लिए 1 प्रतिभागी ने हिस्सा लिया। इस दौरान वृंदावनी सारंग, मधुवंती, बिहाग, जौनपुरी और भीमपलासी जैसे रागों की बहुत प्रसिद्ध बंदिशें प्रस्तुत की गईं। प्रतिभागी लखीमपुर खीरी, लखनऊ, कानपुर, हरदोई और अयोध्या से आए थे। जज: पंडित मिलन देबनाथ (संगीत मिलन के संस्थापक अध्यक्ष), डॉ. सीमा भारद्वाज (अध्यक्ष, भातखंडे एलुमनाई एसोसिएशन), प्रो. सौभाग्य वर्धन (चंडीगढ़ से), डॉ. राम शंकर सिंह वाराणसी से, इंस्ट्रूमेंटल जज: डॉ. सुजीत देवघोरिया (वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान से), पंडित अभिजीत रॉयचौधरी लखनऊ से मौजूद रहे।





