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समाज में फैली विसंगतियों का चित्रण करता है कबीरा

अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में नाटक कबीरा का मंचन
लखनऊ। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से स्वर इण्डिया एसोसिएशन रंगमण्डल लखनऊ द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ में नाटक कबीरा का मंचन किया गया। नाटक निर्देशन चन्द्रभाष सिंह, परिकल्पना एवं संगीत हेम चन्द सिंह का था।
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवल संस्था के अध्यक्ष-कर्नल गुप्ता, सचिव-हेम सिंह व मुख्य अतिथि श्री हरगोविन्द कुशवाहा द्वारा किया गया एवं संस्था को सम्बोधित किया। नाटक कबीरा कबीरदास जी के द्वारा समाज को दी गयी शिक्षाओं एवं निर्गुण भक्ति पर आधारित है। कबीरदास न केवल संत थे, बल्कि एक विचारक सुधारक भी थे एवं समाज की बुराईयो को दूर करने का प्रयास किया। नाटक की शुरूआत कबीर साहेब के स्वर्गवास से होती है एवं अन्तिम संस्कार के लिए आपस में लड़ते झगड़ते है। कबीर के लिए कबीर की काया नहीं, व अपने दोहो, रमनियों व साखियों के माध्यम से दी गयी शिक्षाओं में है।
नाटक अंत में सभी दर्शको से कबीर बनने के लिए कहता है कि उनकी कोई एक बात अपने जीवन में उतार लेना है। ईश्वर हमारे अन्दर है। कबीर वाणी जीवन का अर्थ है, मर्म है, सौन्दर्य है, दर्शन भी है।
सभी किरदारो ने अपनी अलग छाप छोड़ी अन्त में संस्था सचिव एवं अध्यक्ष ने लोगो को धन्यवाद दिया और कलाकारो की हौसला अफजायी कर, कलाकारों को प्रशस्ती पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया।

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