सीजेएम ने पुलिस को 10 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा, चकबंदी अभिलेखों में बदलाव कर निजी नाम दर्ज कराने का आरोप
लखनऊ/गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में शत्रु संपत्ति को कथित रूप से फर्जी तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अमित सिंह ने तत्कालीन एसडीएम समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पुलिस को मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू करने और 10 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आरोपियों में शामिल तत्कालीन एसडीएम वर्तमान में सिद्धार्थनगर जिले में तैनात बताए जा रहे हैं।
मामला तरबगंज तहसील क्षेत्र के गोहनी गांव का है। गांव निवासी अजय पांडेय और राजू सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव की 0.138 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से ऐसे परिवार के नाम दर्ज थी, जो वर्ष 1945 से पहले पाकिस्तान चला गया था। याचिकाकतार्ओं के अनुसार, यह भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज की जानी चाहिए थी।
आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया। इसके बाद भूमि की बिक्री कर उस पर निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया। मामले की सुनवाई के बाद सीजेएम अमित सिंह ने तत्कालीन एसडीएम विश्वमित्र सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक, तत्कालीन हल्का लेखपाल समेत स्वामीनाथ, ओमप्रकाश, रामदयाल, राजेश कुमार और गीता देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस अब मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।





