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अलीगंज अग्निकांड : हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा विस्तृत जवाब, कहा- गोलमोल हलफनामे स्वीकार नहीं होंगे

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अलीगंज अग्निकांड से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को विस्तृत जवाबी हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गोलमोल जवाब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। न्यायमूर्ति राजन राय एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ को प्रदेश सरकार तथा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की ओर से बताया गया कि अग्नि सुरक्षा मानकों और भवन निर्माण नियमों के प्रभावी अनुपालन के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लगभग तैयार है। इसे और जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।


खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जवाबी हलफनामों में जनहित याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों के साथ-साथ अदालत के पूर्व आदेश में व्यक्त की गई चिंताओं का भी स्पष्ट उत्तर दिया जाए। अदालत ने पूर्व में अलीगंज स्थित तीन मंजिला भवन में लगी आग में 15 लोगों की मौत के बाद राज्य की नियामक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि ऐसी घटनाओं के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है, जबकि अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन, स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि संबंधित भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। यह भी स्वीकार किया गया था कि स्वीकृत मानचित्र से विचलन होने के बावजूद अवैध निर्माण को समय रहते नहीं रोका गया।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि आवासीय भवन को व्यावसायिक बिजली कनेक्शन कैसे प्रदान किया गया। साथ ही, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम, 2022 के तहत 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले भवनों को अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र से दी गई छूट पर पुनर्विचार की आवश्यकता भी जताई थी। इस बीच, हादसे में जान गंवाने वाले कुछ लोगों के स्वजन की ओर से दाखिल हस्तक्षेप अर्जी को अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी जवाबी हलफनामों की प्रतियां 12 अगस्त तक याचिकाकर्ता, न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) और हस्तक्षेपकतार्ओं के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाएं। नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि उसका जवाबी हलफनामा पहले ही दाखिल किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

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