लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) छात्रावास योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का मजबूत सहारा बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 2013 छात्र-छात्राओं ने इन छात्रावासों में रहकर अपनी शिक्षा पूरी की, जिससे उन्हें आवास और पढ़ाई से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों से राहत मिली।
प्रदेश में वर्तमान में ओबीसी वर्ग के लिए कुल 102 छात्रावास संचालित हैं। इनमें 59 छात्रावास छात्रों और 43 छात्रावास छात्राओं के लिए हैं। इन छात्रावासों में लगभग 5400 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता उपलब्ध है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सुरक्षित और बेहतर आवासीय सुविधा प्रदान कर उन्हें उच्च शिक्षा से जोड़ना है। राजकीय शिक्षण संस्थानों के परिसरों में बनाए गए इन छात्रावासों से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल, सुरक्षित और अनुशासित वातावरण मिलता है।
सरकार ने केवल नए छात्रावासों के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि पुराने भवनों के रखरखाव और सुविधाओं के उन्नयन पर भी विशेष ध्यान दिया है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2023-24 में छात्रावास अनुरक्षण योजना शुरू की गई। इसके तहत पुराने छात्रावासों की मरम्मत और रखरखाव का कार्य कराया जा रहा है। कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुरक्षण के लिए चयनित 10 छात्रावासों में से 8 का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष में कार्य जारी है।
वहीं वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित छात्रावासों का सर्वे कर 8 अन्य छात्रावासों को प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत के लिए चिन्हित किया गया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह योजना निर्धन छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बन रही है। सुरक्षित आवासीय सुविधा मिलने से हजारों छात्र-छात्राएं अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और प्रदेश की विकास यात्रा में भागीदार बन रहे हैं।





