लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान प्रकाशन अनुदान योजना के तहत साहित्यकारों की 200 पेज तक की कृतियों को प्रकाशित करने में सहयोग करेगा। जिसके लिए 26 अगस्त तक आवेदन मांगे हैं। अनुदान के लिए साहित्यकार को पुस्तक की पांडुलिपि देनी होगी। जिनमें उसे उपयुक्त पुस्तकों का चुनाव करेगा। इस योजना में शोध ग्रंथ या संपादित पांडुलिपि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रकाशन अनुदान योजना अंतर्गत पांच लाख रुपये वार्षिक आय वाले साहित्यकार ही आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आय प्रमाण पत्र, तीन प्रेसों के कोटेशन व दो साहित्यकारों की संस्तुतियां भी देनी होंगी। स्वीकृत पांडुलिपि लेखक या लेखक के उत्तराधिकारी को मुद्रित करानी होगी। संस्थान पुस्तक प्रकाशन के लिए तीन चौथाई धनराशि अनुदान के रूप में देगा, जबकि एक चौथाई धनराशि लेखक को देनी होगी। योजना के तहत दिवंगत साहित्यकार की कृतियों के प्रकाशन के लिए उनके उत्तराधिकारी को भी अनुदान दिया जा सकता है। अनुदान उत्तर प्रदेश में जन्मे या पिछले दस वर्षों से यहां लगातार रह रहे साहित्यकारों को ही दिया जायगा। आवेदन का फार्म संस्थान कार्यालय या संस्थान की वेबसाइट से मिलेंगे।





