लखनऊ। रमजानुल मुबारक का बाबरकत महीना धीरे-धीर रुखसत हो रहा है। रोजेदारों की इबादत में कोई कमी नहीं है। 13 मार्च को रमजान के आखिरी जुमा अलविदा की नमाज होगी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए जुटते हैं। अलविदा नमाज के लिए मस्जिदों में भी खास तैयारी की जाएगी। इस्लामिक सेन्टर आॅफ इंडिया की ओर से अलविदा जुमा की नमाज का समय भी जारी कर दिया गया। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि जामा मस्जिद ईदगाह में अलविदा की नमाज दोपहर 12:45 पर होगी। वहीं नदवें में दोपहर एक बजे नमाज अदा की जाएगी। मस्जिद दरगाह शाहमीना शाही में एक बजे, मस्जिद एक मिनारा अकबरी गेट पर 12:35 पर अलविदा की नमाज अदा की जाएगी। शहर की मस्जिदों में दोपहर 12.30 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक अलविदा की नमाज अदा की जाएगी।
मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि जुमअतुल विदा (अलविदा) 13 मार्च को होगी। मौलाना ने सम्बंधित विभागों से अपील की कि सफाई, और हिफाजत का विशेष एहतिमाम किया जाये ताकि किसी नमाजी को कोई दिक्कत न पेश आये। उन्होने कहा कि जामा मस्जिद ईदगाह लखनऊ में अलविदा की नमाज दोपहर 12:45 पर होगी। मौलाना कहा कि आखिरी अशरे की पांच ताक रातों में शबे कद्र तलाश करना चाहिए। यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान मुताबिक 10 , 12, 14, 16 और 18 मार्च में से कोई एक रात शबे कद्र होगी।
इस बरकत वाली रात के लिए खुदापाक ने फरमाया है कि शबे कद्र हजार महीनों से बेहतर है यानी इस एक नूरानी रात में इबादत का सवाब 83 वर्ष 4 माह से अधिक है। और नबी पाक का इरशाद है कि जिस शख्स ने शबे कद्र में ईमान के साथ और सवाब की उम्मीद के साथ कयाम किया तो उसके पिछले गुनाह माफ कर दिये जाते है। मौलाना फरंगी महली ने कहा कि ईद की नमाज से पहले फित्र: जरूर अदा करें ताकि जो लोग जरूरत मन्द हैं वह भी ईद की खुशियों में शरीक हो सकें।
बाजारों में खूब दिखी रौनक, महिलाओं ने की खरीदारी
रमजान की तैयारियों को लेकर बाजारों में दिन में खूब खरीदारी हुई। खजूर, केला, सेब, अंगूर के साथ खीरा ककड़ी और गाजर खूब बिके। वही महिलाओं ने विभिन्न तरह के पापड़ खरीदने के साथ इफ्तारी के लिए बेसन आदि की खरीदारी की। इसके अलावा किनारे की दुकानों में भीड़ लगी रही। लोगों ने राशन भी खरीदा। शाम होते ही अकीदतमंद बाजार में निकल पड़े। उन्होंने दूधी, दही, चीनी, घी, खीरा, तरबूज, खरबूज, मौसीमी, नारंगी, नींबू, सेवई के अलावा किराना सामग्री की खरीदारी की। बाजार में खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ रही। घरों में महिलाएं पाक रमजान माह को लेकर किचेन की तैयारी में जुटी रहीं। किन चीजों की जरूरत है की सूची बनाई और बाजार जा रहे परिवार के सदस्यों को थमा दीं। रमजान को देखते हुए पुराने लखनऊ के मार्केट में कारीगरों द्वारा सेवई के लच्छे तैयार करना शुरू कर दिए हैं, क्योंकि रोजेदार सहरी में दूध-लच्छे खाना अधिक पसंद करते है। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नक्खास, मौलवीगंज, काजमैन और कश्मीरी मोहल्ला आदि इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई है। यह दुकानदार 160 से 200 रुपये किलो लच्छे बेच रहे हैं।
रमजान में खजूर की बड़ी अहमियत होती है। हर रोजेदार चाहता है कि वह बेहतर खजूर से अपना इफ्तार करे और दूसरों को भी कराए। ऐसे खजूर की मांग है, जो स्वादिष्ट व पौष्टिक हो। रोजेदारों की पसंद को देखते हुए खजूरों की एक से बढ़कर एक वैराइटी मार्केट में आ गई है। खाड़ी देशों समेत इराक व इरान आदि से आने वाले खजूरों की मांग सबसे ज्यादा है। इसमें अजवा खजूर की मांग रोजेदारों में सबसे ज्यादा है।





