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पीएचसी-सीएचसी व जिला अस्पतालों में फीवर क्लीनिक तैयार

  • 24 घंटे इलाज देने के मुकम्मल इंतजाम
  • 3532 पीकू व 1792 आइसोलेशन वार्ड भी स्थापित
  • स्वास्थ्य विभाग की टीमें 02 साल तक के बच्चों को लगा रहीं जेई का टीका

लखनऊ। बरसात के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को मात देने के लिए यूपी के गांव-गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर दस्तक दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरसात के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों पर नकेल कसने की चाक-चौबंद तैयारी की है। इसके लिए प्रदेश में एक जुलाई से ‘दस्तक अभियान’ शुरू किया जा चुका है। संचारी रोगों से जन-जन को बचाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को राज्यस्तरीय ट्रेनिंग दी गयी है। राज्य सरकार ने खासकर इंसेफलाइटिस, डेंगू, मलेरिया जैसे अन्य मच्छर जनित बीमारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग को पहले से ही एलर्ट कर रखा है। इसके लिए सभी अस्पतालों में जांच की व्यवस्थाएं की गयी हैं। प्रदेश के 3011 पीएचसी, 855 सीएचसी और जिला अस्पतालों में फीवर क्लीनिक तैयार हो गये हैं। 592 शहरी पीएचसी में भी रोगियों को 24 घंटे इलाज देने के मुकम्मल इंतजाम पूरे कर लिये गये हैं।

 

टीमें टीबी के सक्रिय मरीज, डेंगू, फाइलेरिया, मलेरिया और इंसेफेलाइटिस आदि से ग्रसित मरीजों की पहचान कर उनका इलाज करा रही हैं। नियमित टीकाकरण सत्रों में 02 साल तक के बच्चों को जेई का टीका भी लगाया जा रहा है। प्रदेश के समस्त खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों समेत अन्य सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी दस्तक अभियान में सहयोग दे रहे हैं। योगी पहले ही संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विशेष रूप से सर्विलांस व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के निर्देश दे चुके हैं। सरकार बीमारी से बचाव और रोकथाम के लिये कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। उन्होंने आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कार्यकार्त्रियों, एएनएम, ग्राम प्रधानों को गांव-गांव में लोगों को इंसेफलाइटिस से बचाव के लिए जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

 

प्रदेश सरकार ने कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए खास तरह के पीडियॉट्रिक आईसीयू तैयार कराये हैं। इनमें बच्चों के लिए बेहतर इलाज की व्यवस्था करायी गयी है। सभी पर वेंटिलेटर की व्यवस्था है। प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अभी तक 3532 पीकू बैड तैयार हो चुके हैं। इनमें 1792 आइसोलेशन और 1740 आईसीयू बैड हैं, जबकि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 2915 बैड तैयार किये गये हैं। इनमें से 1400 आईसोलेशन और 1515 आईसीयू बेड हैं। बच्चों के लिए बनाये जा रहे वार्डों में उनको घर जैसा माहौल देने के लिए अंदर की दीवारों पर कार्टून करेक्टर बनाये जा रहे हैं। बच्चों के लिए खिलौने, ड्राइंग बुक्स आदि की व्यवस्था भी की गयी है।

 

संचारी रोगों के पूर्ण रूप खात्मे के लिये 63148 निगरानी समितियों के 04 लाख से अधिक सदस्य जन-जन तक पहुंच कर लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं। बीमारियों से बचाव और खांसी, जुकाम, बुखार होने पर मौके पर ही प्राथमिक इलाज के रूप में उपयोगी दवाओं को उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी निगरानी में 58189 ग्राम पंचायतों और 97499 राजस्व ग्रामों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। सफाई कार्य में 57370 सफाईकर्मी जुटे हैं। स्वच्छता अभियान के तहत प्रदेश के 5716 स्थलों को कूड़ा मुक्त करा दिया गया है। नगरीय निकायों में कुल 1942 बड़े नालों, 6073 मझोले नाले और 14518 छोटे नालों की सफाई करायी जा चुकी है।

 

 

 

 

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