लखनऊ। वैसे तो फिल्मों का तीर्थ मुंबई नगरी को माना जाता है, लेकिन फिल्मों की शूटिंग के मामले में शुरूआत से ही उत्तर प्रदेश, खासतौर पर लखनऊ, बनारस आदि की अहम भूमिका रही है। फिल्मी इतिहास इस बात का गवाह है कि अपने शैशव काल से ही फिल्मकारों ने लखनऊ और उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगरों को उच्च स्थान दिया है।
फिर वह चाहे प्रयागराज हो, बनारस, कानपुर हो अथवा राज्य के अन्य शहर। प्रदेश के कलाकारों ने भी सिल्वर स्क्रीन पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी है कि उससे भारतीय सिनेमा का मान बढ़ा है। पर यहां के कलाकारों को एक टीस सदैव सालती रही कि उन्हें मुंबई में वह स्थान नहीं मिलता जिसके वह हकदार हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब इस दिशा में भी कदम बढ़ा दिये हैं। बुधवार को योगी मुंबई में शीर्ष फिल्मी हस्तियों के साथ बैठक करके यूपी में प्रस्तावित फिल्म सिटी को पूर्ण आकार देने पर चर्चा करेंगे। साथ ही उन्हें यहां मिलने वाली सुविधाओं से भी अवगत करायेंगे। उन्होंने मुंबई के फिल्म जगत में मची भारी उथल-पुथल के बीच सितंबर में ऐलान किया थि कि यूपी में भी संपूर्ण फिल्म सिटी आकार लेगी। यही नहीं इस घोषणा के दो दिनों के भीतर फिल्म सिटी के लिए जमीन की व्यवस्था भी कर दी गयी। इससे यहां के कलाकारों, फिल्म निर्देशकों और निमार्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने बढ़-चढ़ कर इसमें पूर्ण योगदान देने की प्रतिबद्धता जतायी।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में नई फिल्म सिटी बनाने का ऐलान किया। इस फिल्म सिटी के निर्माण के लिए 1000 एकड़ जमीन दी जाएगी। इस फिल्म सिटी का निर्माण यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह भारत की सबसे बड़ी फिल्म सिटी होगी। सीएम योगी की इस घोषणा से उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग को बहुत बढ़ावा मिलेगा साथ ही लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इस फिल्म सिटी का लोकेशन बहुत शानदार है। यूपी में पर्यटन उद्योग को नए पंख लगाने के मकसद से ही इस फिल्म सिटी की घोषणा की गई है। अगर इसके लोकेशन और कनेक्टिविटी पर गौर करेंगे तो यह जगह कमाल की है। एक्सप्रेस वे पर ही जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। इसका बनना तय है। यमुना एक्सप्रेस-वे सीधा आगरा तक जाता है और उसके बाद आगरा-लखनऊ ताज एक्सप्रेस वे है, जो करीब 300 किलोमीटर लंबा है।
नोएडा से लखनऊ के बीच की 500 किलोमीटर की दूरी ताज एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे की मदद से 5 घंटे में पूरी की जा सकती है। ऐसे में आॅन लोकेशन शूट के लिए भी यह शानदार जगह है। इसी कड़ी में योगी जी ने फिल्म जगत के लोगों के साथ बैठक भी कर ली है। इस बैठक में बॉलीवुड के तमाम बड़े चेहरे शामिल हुए। इसी के साथ यूपी में फिल्म सिटी बसाने के प्रस्ताव को मूर्त रूप देने का काम शुरू हो गया है।
प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में फिल्म सिटी बनाने के लिए एक ओर जहां ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी ने आनन-फानन अपने प्रस्ताव भेजे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की नई फिल्म पॉलिसी से भी सिल्वर स्क्रीन पर यूपी चमक रहा है। आजकल बॉलीवुड की फिल्मों में बनारस के घाट, वृंदावन की गलियां, लखनऊ और कानपुर के नजारे आम हैं। राज्य सरकार की नई फिल्म पॉलिसी से प्रदेश में देसी-विदेशी फिल्मों की शूटिंग बढ़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य में बनने वाली फिल्मों के लिए अनुदान के नियमों में कुछ बदलाव किये हैं।
राज्य सरकार की नई फिल्म नीति के तहत देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली सभी फिल्मों को जहां कुल लागत का 50 फीसदी तक अनुदान के रूप में दिया रहा है। वहीं हिंदी और अंग्रेजी में निर्मित फिल्मों के लिए अनुदान फिल्म की कुल लागत का अधिकतम 25 फीसदी है। पहले यह अनुदान प्रदेश में बनने वाली सिर्फ हिंदी या यूपी की क्षेत्रीय भाषाओं वाली फिल्मों मसलन भोजपुरी और अवधी को मिलता था।





