नयी दिल्ली। एनबीए के महान खिलाड़ी व्लाडे डिवैक इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि भारत में क्रिकेट नंबर एक खेल है लेकिन इसके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि बास्केटबॉल भी देश में अपनी जगह बना लेगा। सैक्रामेंटो किंग्स के सात फीट एक इंच लंबे इस खिलाड़ी ने शुक्रवार को यहां अमेरिकन सेंटर में राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न स्कूलों और अकादमियों के 100 से अधिक बच्चों के साथ बास्केटबॉल खेली।
डिवैक ने कहा, मैं वास्तव में हैरान हूं। बच्चे काफी प्रतिभाशाली हैं। दो ओलंपिक रजत पदक (1988 और 1996) और दो विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक (1990 और 2002) के विजेता डिवैक ने युवा खिलाड़ियों के साथ काफी समय बिताया।उन्होंने कहा, मैं लड़कियों के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हूं। भारत बड़ा देश है और यहां बहुत सारे बच्चे हैं।
भारत अगर सही राह पर चले तो वह इस खेल में मजबूत शक्ति बन सकता है। एनबीए एक वैश्विक ब्रांड है और भविष्य में हमारे पास भारत से कुछ एनबीए खिलाड़ी हो सकते हैं। भारत की एनबीए में पहले भी उपस्थिति रही है, जब कनाडा में जन्मे सिम भुल्लर 2015 में लीग के साथ अनुबंध करने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बने थे।
संयोग से यह सैक्रामेंटो किंग्स ही था जिसने उन्हें टीम में शामिल किया था और उस समय डिवैक टीम के बास्केटबॉल संचालन के उपाध्यक्ष थे। सतनाम सिंह एनबीए में खेलने वाले पहले भारतीय बने थे। उन्होंने 2015 में डलास मावेरिक्स से अनुबंध किया था। डिवैक ने कहा, भारत एक विशाल देश है जिसके लोग बेहद खूबसूरत हैं।
हम बास्केटबॉल के लिए बच्चों को तैयार करने में उनकी मदद करना चाहेंगे। मुझे पता है कि उन्हें कई खेल पसंद हैं, जिनमें सबसे ऊपर क्रिकेट है और उन्हें हमेशा इस खेल से लगाव बनाए रखना चाहिए क्योंकि यह राष्ट्रीय खेल है। भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता को देखते हुए डिवैक ने इसे राष्ट्रीय खेल का दर्जा दे दिया जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है।





