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न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों से एजीआर की राशि के भुगतान की मांगी रूपरेखा

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को निजी दूरसंचार कंपनियों को निर्देश दिया कि वे समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से संबंधित बकाया राशि के भुगतान के बारे में रूपरेखा की जानकारी देते हुए हलफनामे दाखिल करें। इस बीच, वोडाफोन आइडिया ने कहा कि उसके पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है। इस मामले में भारती एयरटेल ने न्यायालय से कहा कि उसने अपनी गणना के आधार पर बकाया राशि का 70 फीसदी दे दिया है और सरकार से परामर्श के बाद शेष राशि का भी भुगतान कर दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समायोजित सकल राजस्व के आधार पर बकाया राशि के भुगतान के मामले पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने हालांकि, इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी लेकिन उसने कंपनियों से जानना चाहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि वे 20 साल की अवधि में भी बकाया राशि का भुगतान कर देंगी। सरकार बकाया राशि के भुगतान के लिए यही समय सीमा चाहती है।

पीठ ने दूरसंचार कंपनियों से सवाल किया कि क्या वे बैंक गारंटी देने के लिए तैयार हैं या उनके निदेशक निजी मुचलका अथवा किसी अन्य तरह की सेक्युरिटी देने के लिए तैयार हैं, क्योंकि न्यायालय इस तरह के अंतर से बकाया राशि के भुगतान की अनुमति नहीं दे सकता है। वोडाफोन आइडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकार की अपनी गणना के अनुसार उस पर 53,000 करोड़ रूपए से अधिक की राशि बकाया है जिसमे ब्याज और बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के कारण उस पर लगा जुर्माना भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि लाइसेंस और स्पेक्ट्रम की अलग-अलग नीलामी हुई थी और उन्होंने हजारों करोड़ रुपए में इसे खरीदा था। रोहतगी ने कहा कि स्पेक्ट्रम की कीमत बकाया राशि के भुगतान के लिए सबसे अच्छी गारंटी हो सकती है और बकाया रकम अदा नहीं करने पर लाइसेंस तथा स्पेक्ट्रम रद्द किया जा सकता है। उन्होने कहा, हम बैंक गारंटी देने की स्थिति में नहीं हैं। हमारे पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने और खर्च के लिए भी पैसा नहीं है। स्पेक्ट्रम बेशकीमती है और हमारे ऊपर बकाया राशि के भुगतान के लिए यह सबसे बेहतरीन गारंटी हो सकती है।

भारती एयरटेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी अपनी गणना के आधार पर उन्होंने 70 फीसदी बकाया रकम का भुगतान कर दिया है और अब बहुत मामूली रकम देने के लिए बची है जिसका भुगतान सरकार से परामर्श के बाद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कंपनी विसतृत हलफनामा दाखिल करेगी। इस पर पीठ ने कहा कि सरकार ने दूरसंचार कंपनियों द्वारा इस बकाया राशि के भुगतान के लिए 20 साल की अवधि निर्धारित करने का सुझाव दिया है लेकिन कल किसी ने नहीं देखा है और अगर कोई कंपनी दिवालिया हो गई तो क्या होगा।

पीठ ने कहा कि यह वाद 1999 में शुरू हुआ था और इसमें 20 साल पहले ही बीत चुके हैं और 20 साल का समय और मांगा जा रहा है। क्या इसे तर्कसंगत कहा जा सकता है। इस पर अंतरिम समाधान पेशेवरों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि तीन दूरसंचार कंपनियों को दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही चल रही है और वे समाधान की प्रक्रिया में हैं। इस पर न्यायमूर्ति शाह ने दूरसंचार कंपनियों के वकीलों से कहा कि इतनी आमदनी के बावजूद उनमें से एक भी कंपनी ने कोविड-19 राहत कोष के लिए कुछ भी नहीं किया है।

एयरटेल ने कहा कि उसने एक सौ करोड़ रुपए दिए हैं जबकि टाटा समूह ने कहा कि उसने 1500 करोड़ रुपए दिए हैं। भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा समूह द्वारा किए गए स्वत: आकलन के आधार पर सरकार को 82,300 करोड़ रुपये देय हैं जो शीर्ष अदालत के 24 अक्टूबर के फैसले के बाद दूरसंचार विभाग की गणना से कम है। बकाया राशि के भुगतान की अवधि में राहत के लिए अनुरोध करते हुए दूरसंचार विभाग ने कहा है कि भारती एयरटेल पर 43,980 करोड़, वोडाफोन आइडिया पर 58,254 करोड़ और टाटा समूह पर 16,798 करोड़ रुपये देय हैं।

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