कला से प्रेरित चित्रकला कार्यशाला का समापन
लखनऊ। लखनऊ पब्लिक स्कूल, आनंद नगर शाखा में एस्थेटिक एंड कल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम 2026झ्र27 के अंतर्गत प्रख्यात भारतीय कलाकार मंजित बावा (1941-2008) की कला से प्रेरित छह दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का भव्य एवं सफल समापन हुआ। 3 से 8 अगस्त तक आयोजित इस रचनात्मक कार्यशाला में 32 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग करते हुए मंजित बावा की कला-दृष्टि से प्रेरित 32 चित्रों का सृजन किया। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा उनकी कलाकृतियों की आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। मंजित बावा की विशिष्ट कला-भाषा को केंद्र में रखते हुए आयोजित कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए रंग, रूप, कल्पना और भारतीय कला-दृष्टि को समझने की एक रचनात्मक एवं बौद्धिक यात्रा सिद्ध हुई। विद्यार्थियों ने बावा की कृतियों में दिखाई देने वाली काव्यात्मक सरलता, विशिष्ट रंग-संयोजन, प्रवाहमयी आकृतियों तथा भारतीय मिथक, आध्यात्मिकता, प्रकृति और सांस्कृतिक चेतना से उनके गहरे जुड़ाव को समझने का प्रयास किया। विभिन्न रचनात्मक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने रंग, रेखा, रूप, संयोजन और प्रतीकात्मकता के साथ प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को विकसित किया।
इस अवसर पर फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी के क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने कहा, मंजित बावा अपनी रंग-बिरंगी, कल्पनाशील और विशिष्ट चित्रभाषा के लिए भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। उनकी कला हमें प्रकृति, पशु-पक्षियों, संगीत, आध्यात्मिकता और अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति से प्रेम करना सिखाती है। हर बच्चे के भीतर एक कलाकार छिपा होता है। जब बच्चे रंगों से खेलते हैं, चित्र बनाते हैं और अपनी कल्पनाओं को कागज पर उतारते हैं, तो उनकी सोच और संवेदनशीलता और भी सुंदर बनती है। इसलिए बच्चों को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका चित्र अच्छा है या बुरा। सबसे सुंदर चित्र वही होता है, जिसमें उनके मन की खुशी, कल्पना और अपनी सोच दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह से चित्र बनाए, रंगों के साथ नए-नए प्रयोग किए और अपनी कल्पना को खुलकर उड़ान दी। कला हमें केवल चित्र बनाना नहीं सिखाती, बल्कि सुंदर सोच, धैर्य, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और रचनात्मकता के साथ जीवन को देखने की दृष्टि भी देती है। लखनऊ पब्लिक स्कूल द्वारा इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन अपने आप में एक सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर कला और कलाकारों को जानने-समझने की जिज्ञासा पैदा करते हैं तथा उन्हें प्रकृति और अपने सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
कार्यशाला के समापन अवसर पर फैशन डिजाइनर एवं मेकअप आर्टिस्ट सुश्री प्राची खरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों की कलाकृतियों का अवलोकन करते हुए उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों को कला, डिजाइन, कल्पना और दृश्य संस्कृति के परस्पर संबंधों को समझने के लिए प्रेरित किया। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को समकालीन रचनात्मकता का एक नया आयाम प्रदान किया।





