राकू एवं टेराकोटा पर विशेष समर आर्ट कैंप का शुभारंभ
लखनऊ। लखनऊ के विनम्र खंड, गोमती नगर परिसर में फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से 21 मई से 29 मई तक पॉटरी, राकू एवं टेराकोटा पारंपरिक तकनीकों पर आधारित एक विशेष एवं प्रेरणादायक आर्ट समर कैंप का सफल शुभारंभ किया गया। यह कैंप प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक, रविवार सहित आयोजित किया जायेगा, जिसमें रचनात्मक एवं पारंपरिक कला विधाओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला का संचालन प्रख्यात अतिथि कलाकार प्रेम शंकर प्रसाद द्वारा किया गया, जिन्होंने सिरेमिक कला एवं पारंपरिक मृत्तिका शिल्प की अपनी व्यापक जानकारी और व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
पूरे कैंप के दौरान विद्यार्थियों को मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया, हैंड-बिल्डिंग तकनीक, टेराकोटा शिल्प निर्माण तथा राकू पॉटरी में उपयोग होने वाली विशेष फायरिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रेम शंकर प्रसाद ने पॉटरी कला के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन कला विधाओं में से एक बताया। उन्होंने लोक एवं समकालीन सिरेमिक कलाकारों द्वारा प्रयोग की जाने वाली विभिन्न पारंपरिक तकनीकों की जानकारी दी तथा यह प्रदर्शित किया कि प्राकृतिक तत्वों और अग्नि की प्रक्रिया से मिट्टी किस प्रकार अभिव्यक्तिपूर्ण कलाकृतियों में परिवर्तित हो जाती है। सत्रों के दौरान विद्यार्थियों ने मिट्टी के चयन, आकार निर्माण, सतही अलंकरण, टेक्सचर निर्माण, ग्लेजिÞंग प्रक्रिया तथा राकू पॉटरी की विशेष फायरिंग तकनीक के बारे में विस्तार से सीखाया जाएगा। कैंप का मुख्य आकर्षण लाइव राकू फायरिंग प्रदर्शन रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने धुएँ, ताप और तीव्र शीतलन से उत्पन्न होने वाले अप्रत्याशित एवं आकर्षक प्रभावों को प्रत्यक्ष देखा। कलाकार ने प्रतिभागियों को सुरक्षा उपायों, भट्ठी संचालन तथा सिरेमिक कला में प्रयोगधर्मिता के महत्व के विषय में भी मार्गदर्शन दिया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक टेराकोटा तकनीकों का उपयोग करते हुए विभिन्न बर्तन, सजावटी रूपाकार, मुखौटे एवं मूर्तिकला आधारित कलाकृतियाँ उत्साहपूर्वक निर्मित करेंगे। कैंप को विशेष रूप से समृद्ध बनाया गेस्ट आॅफ द डे वरिष्ठ कला समीक्षक आलोक पराड़कर की उपस्थिति ने।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचियों एवं रचनात्मक अभिरुचियों का निडर होकर अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी क्षमता एवं कल्पनाशक्ति के अनुरूप विषयों का चयन करने तथा कला के माध्यम से व्यक्तित्व विकास और करियर संभावनाओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता चौधरी ने इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक कला विधाओं में सक्रिय रूप से सीखते देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे रचनात्मक मंचों का भरपूर लाभ उठाकर अपनी कलात्मक दक्षता, अनुशासन एवं सांस्कृतिक समझ को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। लखनऊ पब्लिक स्कूल एंड कॉलेजेस एवं फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी के निदेशक नेहा सिंह ने सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कला शिक्षा केवल सृजनात्मकता का विकास नहीं करती, बल्कि ललित कला, डिजाइन, मूर्तिकला, सिरेमिक्स एवं दृश्य संप्रेषण जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट करियर संभावनाएँ भी प्रदान करती है। उन्होंने इस प्रकार के व्यावहारिक समर कैंपों के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। राजेश कुमार ने बताया कि विशेष आर्ट समर कैंप उत्साह, सृजनशीलता और सीखने की ऊर्जा के साथ प्रारंभ हुआ, जिसने विद्यार्थियों को पॉटरी एवं दृश्य कला की समृद्ध दुनिया को आगे भी खोजने और समझने के लिए प्रेरित किया। जानकारी देते हुए गैलरी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने कार्यशाला के संदर्भ में कहा कि इस प्रकार के समर आर्ट कैंप विद्यार्थियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देते, बल्कि उन्हें भारतीय पारंपरिक कला विरासत से भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि राकू एवं टेराकोटा जैसी विधाएँ विद्यार्थियों में धैर्य, संवेदनशीलता और प्रयोगधर्मिता विकसित करती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कला के व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





