नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों में हालिया एक घटना ने बड़ी कूटनीतिक कड़वाहट पैदा कर दी है। नेपाल की सरकारी विमानन कंपनी, नेपाल एयरलाइंस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने वाला एक अत्यंत आपत्तिजनक नक्शा साझा किया। इस विवादित मानचित्र में भारत के मुकुट कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण हिस्से को पाकिस्तान के भू-भाग के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इस घटनाक्रम के सामने आते ही न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल मच गई, बल्कि डिजिटल दुनिया में भारतीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब नेपाल एयरलाइंस ने अपने अंतरराष्ट्रीय उड़ान नेटवर्क और गंतव्यों को प्रमोट करने के लिए माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक ग्राफिक साझा किया। इस ग्राफिक में दक्षिण एशिया का जो मानचित्र इस्तेमाल किया गया, उसमें जम्मू-कश्मीर को जानबूझकर या अनजाने में पाकिस्तान की सीमा के भीतर दिखाया गया था। जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुई, भारतीय नेटिजन्स ने इसे भारत की अखंडता पर सीधा प्रहार करार दिया। जानकारों का मानना है कि बालेन शाह की सरकार के दौरान नेपाल में पनप रहे कथित भारत विरोधी स्वर अब वहां के सरकारी संस्थानों की डिजिटल गतिविधियों में भी स्पष्ट रूप से झलकने लगे हैं।
इस संवेदनशील मुद्दे पर भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने सबसे पहले मुखर होकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नेपाल एयरलाइंस की इस हरकत को महज एक ‘तकनीकी त्रुटि’ मानने से इनकार करते हुए इसे ‘सोची-समझी राजनीतिक उकसावे वाली कार्रवाई’ बताया। खेसारी लाल ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर एक सरकारी विमानन कंपनी किसी दूसरे देश के नक्शे के साथ इतनी बड़ी छेड़छाड़ कर सकती है। उन्होंने इस कृत्य को भारतीय भावनाओं को चिढ़ाने वाला बताते हुए नेपाली अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे गंभीर विषय पर ऐसी गलती अक्षम्य है।
विवाद की आग तब और फैल गई जब प्रसिद्ध सोशल मीडिया एक्टिविस्ट दिव्या टंडन ने इस मामले का गहरा विश्लेषण साझा किया। उन्होंने नेपाल की भारत पर आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता को रेखांकित करते हुए लिखा कि भारत ने हमेशा नेपाल के लिए ‘ऑक्सीजन’ का काम किया है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे खुली सीमाओं के जरिए लाखों नेपालियों को भारत में रोजगार मिलता है और नेपाल का बुनियादी ढांचा भारतीय बंदरगाहों, ईंधन पाइपलाइनों और बिजली परियोजनाओं पर टिका है। दिव्या टंडन ने इसे एक ‘कृतघ्न राजनीतिक बयान’ बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद की एक बड़ी लहर दौड़ गई।
भारी दबाव और चौतरफा विरोध के बाद नेपाल एयरलाइंस ने विवादित पोस्ट को हटा तो लिया, लेकिन भारतीय यूजर्स इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। खेसारी लाल यादव और अन्य एक्टिविस्ट्स ने स्पष्ट किया है कि केवल पोस्ट डिलीट कर देने से अपराध कम नहीं हो जाता, इसके लिए सार्वजनिक माफी की आवश्यकता है। दूसरी ओर, कुछ नेपाली यूजर्स इसे ग्राफिक डिजाइनर की मानवीय भूल बताकर बचाव कर रहे हैं। प्रभात काफले जैसे कुछ नेपाली नागरिकों का तर्क है कि गोरखा सैनिकों ने भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए अपना खून बहाया है, इसलिए कोई भी नेपाली कश्मीर की स्थिति पर संदेह नहीं करता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर निर्भरता के तर्कों को अपमानजनक तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए।
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना नेपाल में हाल के वर्षों में राष्ट्रवाद के नाम पर बढ़ती भारत विरोधी भावनाओं का हिस्सा हो सकती है। सीमा विवादों को लेकर काठमांडू का आक्रामक रुख और अब सरकारी संस्थानों द्वारा ऐसे आपत्तिजनक मानचित्रों का उपयोग भारत-नेपाल संबंधों की संवेदनशीलता को और बढ़ा रहा है। फिलहाल, भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन डिजिटल मंचों पर ‘बॉयकॉट नेपाल एयरलाइंस’ और ‘बॉयकॉट नेपाल’ जैसे अभियान तेजी से जोर पकड़ रहे हैं। यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल युग में छोटी सी लापरवाही भी दो पड़ोसी देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास को गहरी चोट पहुँचा सकती है।





