लखनऊ। बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ संस्कृति विभाग, उ .प्र. द्वारा आयोजित कथक संध्या का आयोजन राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में किया गया। कथक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. हरिओम, प्रमुख सचिव, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग, उ0प्र0, संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर तथा उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। डॉ हरिओम ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में संस्थान की भूमिका की सराहना की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा राग मियां मल्हार में निबद्ध बंदिश बिजुरी चमके बरसे मेहरवा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संगीत संयोजन संस्थान के प्रशिक्षकों द्वारा किया गया। इस क्रम में हारमोनियम- मीना वर्मा, सिंथेसाइजर- कृष्ण कुमार मौर्य, तबला- नीतीश भारती एवं आनंद दीक्षित एवं बांसुरी- स्वयं मिश्रा ने अपने सहयोग से प्रस्तुति को सार्थक और सुंदर बनाया। इसके उपरांत जयपुर घराने के सुप्रसिद्ध कथक कलाकार श्री चेतन कुमार जवड़ा ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ शिव स्तुति हे अमरनाथ, हे विश्वनाथ से किया। इसके पश्चात राग बसंत व ताल बसंत (9 मात्राएँ) की मनोहारी प्रस्तुति देकर जयपुर घराने की विशिष्ट लयकारी, भावाभिव्यक्ति एवं तकनीकी उत्कृष्टता का परिचय दिया।
पंडित सुंदरलाल गंगानी की वर्षा ऋतु पर आधारित रचना प्रस्तुत की गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम का समापन द्रुत तीनताल की ऊजार्वान प्रस्तुति से हुआ, जिसमें जटिल ताल-विन्यास, प्रभावशाली पद-संचालन एवं आकर्षक गतियों ने दर्शकों की भरपूर प्रशंसा प्राप्त की। प्रस्तुति में रमेश मेवाल ने गायन एवं हारमोनियम, भावदीप जवड़ा ने पखावज एवं पढ़ंत तथा मोहित चैहान ने तबले पर प्रभावशाली संगत कर कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाया। कथक प्रस्तुति के उपरांत संस्थान के अभिरुचि पाठ्यक्रम के सफल विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि, व संस्थान की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष द्वारा प्रमाण-पत्र (ब्मतजपपिबंजम) प्रदान किए गए। इस अवसर पर विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी गईं। मंच संचालन तरूश्री द्वारा किया गया।





