लखनऊ। ज्योतिष विद्या में गुरु पूर्णिमा का दिन विशेष महत्व रखता है। गुरु पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की आराधना की जाएगी। गुरु पूर्णिमा की तिथि पर चंद्रमा को अर्घ्य देना बेहद ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने से सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। हर साल आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल की गुरु पूर्णिमा पड़ती है। वहीं, 28 जुलाई 2026, मंगलवार के दिन शाम 06 बजकर 18 मिनट से आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरूआत होगी, जो बुधवार, 29 जुलाई 2026 के दिन शाम 08 बजकर 05 मिनट तक रहने वाली है। उदया तिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मान्य होगी और इसी दिन गुरु पूर्णिमा व्रत और दान-स्नान किया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के दिन रात में 11 बजकर 58 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। इस दिन दोपहर में 03 बजकर 37 मिनट तक उत्तराषाढा नक्षत्र रहेगा।
गुरु पूर्णिमा के दिन पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी नारायण की साथ में पूजा करनी चाहिए। इस दिन विष्णु भगवान को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए और लक्ष्मी माता को गुलाबी या लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए। वहीं, गुरु पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ना पुण्यदायक माना जाता है। गुरु पूर्णिमा तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, अगर आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान करें। गुरु पूर्णिमा का व्रत रखने और इस दिन लक्ष्मी नारायण की विधिवत पूजा करने से घर में सुख- संपत्ति और खुशहाली बनी रहती है।
गुरु पूर्णिमा पर शुभ योग
यदि किसी पर्व पर शुभ योगों का संयोग बनता है तो उसका आध्यात्मिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. इस साल गुरु पूर्णिमा भी इसी कारण विशेष मानी जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और हर्षण योग बनने वाला है. दोनों योग पूरे दिन प्रभावी रहेंगे. ज्योतिष में प्रीति योग को प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जबकि हर्षण योग सफलता, प्रसन्नता और शुभ परिणाम देने वाला योग माना जाता है. ऐसे में इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या उपाय करें?
गुरु पूर्णिमा के दिन पवित्र जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्रदेव की कृपा सदैव बनी रहती है। इससे मानसिक सुख-शांति भी बनी रहती है।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है, क्योंकि वही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत सहित अनेक महान ग्रंथों की रचना की। इसलिए इस दिन उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। जो लोग किसी गुरु से दीक्षा प्राप्त कर चुके हैं, वे इस दिन अपने गुरु का आशीर्वाद लेकर उनका सम्मान करते हैं। जिनका कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं है, वे अपने माता-पिता, शिक्षकों या जीवन में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं।
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि
गुरु पूर्णिमा के दिन प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं। भगवान को पुष्प, फल, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें। यदि संभव हो तो सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ या श्रवण करें। अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा उनकी सेवा या सम्मान स्वरूप कोई उपहार अर्पित करें। शाम के समय चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें अर्घ्य दें और पूजा के बाद व्रत का पारण करें।
इस दिन दान क्यों माना जाता है शुभ?
गुरु पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, दक्षिणा, धार्मिक पुस्तकें, छाता, जल पात्र या जरूरतमंदों की आवश्यक वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है। इससे ज्ञान, सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
घर में सुख, शांति और सौभाग्य का वास होता है:
गुरु पूर्णिमा का दिन अध्यात्म, श्रद्धा और आत्मविकास का पर्व है, वहीं गुरुवार बृहस्पति देव का दिन होता है जो धर्म, नीति, और सुख-शांति के प्रतीक हैं। इस विशेष दिन घर में श्री सत्यनारायण भगवान की कथा करवाने से न केवल वातावरण में सात्विकता और सकारात्मक ऊर्जा आती है, बल्कि घर में लड़ाई-झगड़े, तनाव और क्लेश जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं। यह पूजा गृहस्थ जीवन में समझदारी, सौहार्द और परस्पर प्रेम को बढ़ावा देती है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य में भी सुधार देखा जा सकता है।
आर्थिक बाधाएं दूर होकर लक्ष्मी का आगमन होता है:
सत्यनारायण भगवान को धन, वैभव और समृद्धि के रक्षक माना जाता है। गुरु पूर्णिमा जैसे शुभ दिन पर कथा आयोजित करने से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं, नौकरी और व्यापार में आ रही अड़चनों का समाधान मिलता है। बृहस्पति ग्रह की कृपा से निवेश में लाभ, कर्ज़ से मुक्ति, और आमदनी में निरंतर वृद्धि के योग बनते हैं। यह कथा विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी है जो आर्थिक अस्थिरता, उधारी, या नौकरी में असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
गुरु कृपा और आध्यात्मिक विकास:
गुरु पूर्णिमा का मूल उद्देश्य ही होता है, गुरु के प्रति श्रद्धा और आत्मा का शुद्धिकरण। इस दिन सत्यनारायण कथा का आयोजन व्यक्ति के आध्यात्मिक उत्थान, साधना में सफलता और चित्त की स्थिरता लाने में सहायक होता है। विद्यार्थियों को विद्या, स्मरण शक्ति और अनुशासन की प्राप्ति होती है, वहीं साधकों को ध्यान, जप, और तप में मन की एकाग्रता मिलती है। यह दिन आत्मबोध और जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
गोमती आरती संग गुरुओं का पंच द्रव्यों से किया जायेगा अभिषेक
लखनऊ। गुरु पूर्णिमा पर शहर में विविध आयोजन किये जायेंगे। मनकामेश्वर मठ मंदिर पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मठ के महंत रहे पूज्य गुरुओं का पंच द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। इस अनुष्ठान में महंत देव्यागिरि मठ के पूर्व महंत को रोली, चंदन अक्षत से तिलक कर पूजन करेंगी। वहीं मठ से दीक्षा लिए भक्त भी गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लेने आएंगे। शाम को मनकामेश्वर घाट पर गुरु की स्मृति में आरती होगी। लखनऊ विश्वविद्यालय मार्ग स्थित हनुमान सेतु मंदिर में गुरु पूर्णिमा के एक दिन पूर्व रामायण का पाठ शुरू होगा। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजन, मंदिर के पुजारी और गुरुकुल के अंतिम वर्ष के छात्र बजरंगबली और बाबा नीम करोरी महाराज का अभिषेक करेंगे। पर्व को लेकर शहर में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। इस अवसर पर शहर में जगह-जगह शिष्य गुरु की पादुका पूजन करेंगे। साथ ही आशीर्वाद लेंगे। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा त्योहार मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, यही कारण है कि इस दिन को वेद व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा और व्रत करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन गुरुओं की पूजा भी की जाती है।





