कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय भारी उबाल आ गया, जब केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की एक बड़ी टीम ने कोलकाता के कालीघाट स्थित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर तड़के छापेमारी की। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में सुबह करीब तीन बजे पुलिस और केंद्रीय बल के जवानों ने अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित पूरे परिसर को घेर लिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और चार घंटे से अधिक समय तक हर कमरे की गहन तलाशी ली। इस कार्रवाई की भनक मिलते ही टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी तुरंत मौके पर पहुंच गईं। बाद में मीडिया से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने भी घर का ताला तोड़े जाने और गहन तलाशी की पुष्टि की, हालांकि पुलिस की ओर से इस अचानक हुई कार्रवाई की वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई इस कार्रवाई के समानांतर ही राज्य में एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा के करीब सात ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। कामरहाटी सीट से विधायक मदन मित्रा पर आरोप है कि नगर पालिकाओं में लगभग 125 अवैध नियुक्तियों के बदले बिचौलियों के माध्यम से नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली गई। यह पूरा घोटाला पूर्व में हुए स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के दौरान प्रमोटर अयान शील के ठिकाने से मिले दस्तावेजों के बाद सामने आया था, जिसकी जांच फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है। इस छापेमारी से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा के प्रभाव वाली कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद मदन मित्रा ने सभी टीएमसी पार्षदों से इस्तीफे की पेशकश करने और कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी।
इस दोहरे प्रशासनिक संकट और केंद्रीय एजेंसियों की आक्रामक कार्रवाई के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ दिनों से चल रही गंभीर अंदरूनी खींचतान पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर जिस विवाद ने एक बड़े आंतरिक संकट का रूप ले लिया था, वह राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के बीच अचानक बदले रुख और दिखी नरमी के बाद शांत होता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष के शीर्ष नेताओं पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ बाहरी दबाव के बीच पार्टी के भीतर उपजे इस अप्रत्याशित समझौते ने पश्चिम बंगाल के सियासी घटनाक्रम को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है।





