लखनऊ। शब-ए-आशूर का जुलूस गुरुवार को विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब से निकलते ही फिजा में या हुसैन, या हुसैन की दर्द भरी सदाएं गूंजने लगीं। जुलूस में आगे आगे हजरत अब्बास का अलम तो पीछे जियारत करते गमगीन अजादारों का हुजूम चल दिया।
शहर की तमाम अंजुमनें अपने अलम के साथ नौहाख्वानी और सीनाजनी करती हुईं पीछे चल दीं। जुलूस में शामिल तमाम अजादार जंजीर व कमा का मातम कर इमाम को अपने खून से पुरसा दे रहे थे। जुलूस शिया कॉलेज, चिड़िया बाजार, नक्खास तिराहा, बिल्लौचपुरा क्रासिंग से दीनदयाल रोड, अर्शफाबाद, गिरधारी सिंह इंटर कालेज, मंसूर नगर, शिया यतीमखाना होता हुआ देर रात दरगाह हजरत अब्बास पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस निकलने से पहले इमामबाड़ा नाजिम साहब में मजलिस को मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने खिताब किया।
इमाम हुसैन और नन्हे अली असगर की शहादत का मनाया गम
मुहर्रम की नौ तारीख शब-ए-आशूर पर मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन और उनके छह माह के मासूम बेटे अली असगर की शहादत का मंजर पेश किया गया। गुफरानमाब इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा कि कर्बला के मानने वाले कभी जालिमों की हिमायत नहीं कर सकते। इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी, इमामबाड़ा सैयद तकी साहब में मौलाना सैफ अब्बास नकवी, मदरसा नाजमिया में मौलाना हमीदुल हसन, इमामबाड़ा कसरे हुसैनी में मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी, मकबरा सआदत अली खां में मौलाना मुराद रजा और इमामबाड़ा नाजिम साहब में मर्सियाख्वानी की मजलिस में अहसन सईद ने रूप कुमारी का मर्सिया पढ़ कर हजरत इमाम हुसैन और उनके छ माह के बेटे अली असगर को पुरसा दिया।
दहकते अंगारों पर चल इमाम को पेश की खिराजे अकीदत
कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में अंजुमने गुलामान-ए-हैदरे कर्रार की ओर से शाहनजफ इमामबाड़े में आग पर मातम का आयोजन किया गया। राजकिशोर और दीपक आदि हिंदू अजादारों ने भी दहकतों अंगारों पर चलते हुए कर्बला के शहीदों को पुरसा दिया। दरगाह हजरत अब्बास परिसर में भी अजादारों ने दहकतों हुए अंगारों पर मातम कर इमाम को पुरसा दिया।
यौम-ए-आशूर का जुलूस आज
मुहर्रम की दस तारीख शुक्रवार को यौम-ए-आशूर का जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब से निकाला जाएगा। इससे पहले इमामबाड़ा परिसर में सुबह 10 बजे मजलिस होगी। सुन्नी समुदाय की ओर से छोटे-छोटे जुलूस की शक्ल में ताजिये बादशाहनगर स्थित कर्बला में पहुंचकर दफन किए जाएंगे।





