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कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संरक्षक : राज्यपाल

लोक संगीत, लोक नृत्य और लोक गायन को केवल स्मृतियों तक सीमित न रखकर वर्तमान जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक
लोक कलाकार हमारी सनातन सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं, उनके साथ सरकार और जन भवन सदैव खड़ा रहेगा : उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
जन भवन, लखनऊ के गांधी सभागार में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ द्वारा आयोजित अकादमी सम्मान समारोह-2026
लखनऊ। जन भवन, लखनऊ के गांधी सभागार में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ द्वारा आयोजित अकादमी सम्मान समारोह-2026 में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वर्ष 2021, 2022, 2023 तथा 2024 के लिए चयनित कुल 51 विशिष्ट कलाकारों को संगीत, नृत्य, नाटक एवं लोककलाओं के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, उत्कृष्ट सृजन, साधना तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए अकादमी सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोककलाओं एवं भारतीय कलात्मक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन में कलाकारों के अमूल्य योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने राज्यपाल का संदेश उपस्थित जनों के समक्ष पढ़कर सुनाया। राज्यपाल ने अपने संदेश में सभी सम्मानित कलाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल, सृजनशील और सफल भविष्य की कामना की और कहा कि सम्मानित कलाकारों के प्रयासों से हमारी सांस्कृतिक विरासत न केवल संरक्षित हुई है, बल्कि समय के साथ और अधिक सशक्त एवं समृद्ध भी हुई है। राज्यपाल ने अपने सदेश में कहा कि कला अतीत की धरोहर होने के साथ-साथ भविष्य की प्रेरणा भी है। कला वह सुरभि है, जो समय की सीमाओं को लांघकर युगों-युगों तक अपनी सुगंध बिखेरती रहती है। लोक गायन में जहां स्वर सरस्वती का आह्वान करते हैं, वहीं वादन में लय और ताल जीवन की गति को अभिव्यक्त करते हैं। रंगमंच पर कलाकार जीवन के यथार्थ को साकार करते हैं, तो नाट्य लेखन समाज की संवेदनाओं को शब्दों का रूप प्रदान करता है। अभिनय और साहित्य दोनों ही समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। इन सभी विधाओं में विशिष्ट योगदान देने वाले कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान का एक सशक्त साधन है। आज का अवसर हमें कला के महत्व को समझने, उसे संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ियों तक उसकी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रेरणा देता है। किसी सभ्यता की आत्मा को समझना हो तो उसके लोकगीतों और लोकनाट्यों को समझना आवश्यक है, क्योंकि लोक-संस्कृति हमारी परंपराओं की वह जीवंत धारा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी पहचान को प्रवाहित करती आई है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी क्रांति के इस दौर में लोक संगीत, लोकनाट्य और लोकगीतों की मधुर स्वर-लहरियां कहीं न कहीं धुंधली पड़ती जा रही हैं तथा नई पीढ़ी का झुकाव तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में उन साधकों और कलाकारों का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी साधना और समर्पण के बल पर इन परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व है। यदि हम आज इसे सहेजने में असफल रहे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी। इसलिए इन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को जन-जन का दायित्व बनाना होगा।
अपने संदेश में राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी वर्षों से लोक संगीत एवं लोक नाट्य परंपराओं के संरक्षण हेतु सर्वेक्षण और डॉक्यूमेंटेशन का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इसके अंतर्गत अब तक लगभग 5500 घंटे से अधिक की दुर्लभ आॅडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित की जा चुकी हैं। कत्थक के लखनऊ घराने की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए स्वर्गीय गुरु लच्छू महाराज के मार्गदर्शन में कत्थक केंद्र की स्थापना की गई तथा अकादमी निरंतर नाट्य समारोहों का आयोजन कर रही है।
उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष स्वर्गीय लच्छू महाराज की जयंती पर नमन, गजल विधा को समर्पित यादें तथा स्थापना दिवस पर धरोहर जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त गायन, वादन एवं नृत्य की नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के लिए संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। रसमंच योजना के अंतर्गत संगीत और नाटक से जुड़ी संस्थाओं को प्रत्येक माह वाल्मीकि रंगशाला नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। ये सभी योजनाएं और कार्यक्रम मिलकर उस व्यापक सांस्कृतिक संकल्प को साकार करते हैं, जिसमें कला केवल मंच तक सीमित न रहकर समाज की चेतना का अभिन्न हिस्सा बन जाती है।
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी संस्कृति की जीवंतता होती है। भारत में लोक-संगीत, लोक-नृत्य और लोक-गायन की परंपराएं सदियों से हमारी सांस्कृतिक चेतना को स्पंदित करती रही हैं। आज भजन क्लबिंग जैसे नए सांस्कृतिक स्वरूप इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी लोक परंपराएं समय के साथ स्वयं को नए रूप में अभिव्यक्त करने की क्षमता रखती हैं। भक्ति के स्वर भले ही नए मंचों पर गूंज रहे हों, किंतु उनकी आत्मा आज भी उतनी ही पवित्र और समर्पित है। उन्होंने कहा कि आज जब भारत की सांस्कृतिक पहचान विश्व के प्रत्येक कोने में अपनी छाप छोड़ रही है, तब अपनी सांस्कृतिक जड़ों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। विदेशों में बसे भारतीय जिस प्रकार अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। लोक संगीत, लोक नृत्य और लोक गायन की परंपराओं को केवल स्मृतियों तक सीमित न रखकर उन्हें वर्तमान जीवन का हिस्सा बनाना होगा तथा नई पीढ़ी को उनसे जोड़ना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना तब और अधिक सशक्त होती है, जब उसकी जड़ें शिक्षा से जुड़ती हैं। इसलिए विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लोक कला, लोक संगीत और लोक नृत्य जैसी विधाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जन भवन, उत्तर प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत राजकीय बालिका गृह की बालिकाओं को कथक, भरतनाट्यम तथा अन्य शास्त्रीय एवं लोक कलाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सकारात्मक जीवन दृष्टि का विकास हो रहा है। अपने उद्बोधन में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी सम्मानित कलाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, ज्ञान, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का वह केंद्र है जिसने सदियों से विश्व को दिशा देने का कार्य किया है। भारत की महान विभूतियों ने हमेशा दुनिया का मार्गदर्शन किया है तथा शून्य (जीरो) से लेकर अर्थशास्त्र तक अनेक अमूल्य ज्ञान परंपराएं विश्व को भारत ने ही प्रदान की हैं। कलाकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के सच्चे संवाहक हैं और लोक कला, लोक संगीत तथा लोक परंपराओं को जीवित रखकर राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ बनाने का कार्य कर रहे हैं। देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कलाकारों एवं लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, सम्मान और प्रोत्साहन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं तथा उन्हें उचित मंच उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि लोक कलाकारों के साथ सरकार तथा जन भवन सदैव खड़ा रहेगा और उनकी कला के विकास एवं संवर्धन के लिए आवश्यक सुविधाएं विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह गांव में रहता हो अथवा शहर में, एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प भी ले। विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल अपर मुख्य सचिव स्तर डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने सभी अतिथियों, सम्मानित कलाकारों, कला साधकों, अकादमी पदाधिकारियों तथा सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर जयन्त खोत, उपाध्यक्ष श्रीमती विभा सिंह, संस्कृति विभाग के विशेष सचिव संजय कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर सहित अकादमी के पदाधिकारी, विभिन्न कला विधाओं से जुड़े प्रतिष्ठित कलाकार, कला साधक एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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