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ट्रैन, हवाई जहाज व बस से आने वालों का हो एंटीजन टेस्ट : मुख्य सचिव
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प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बनायीं जायें कोविड हेल्प डेस्क
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ज़्यादा पॉजिटिव मामलों वाले जिलों में हो टारगेट टेस्टिंग की समीक्षा
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ज़्यादा केसेस वाले जिलों की कराई जाये गूगल मैपिंग
लखनऊ। दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले उत्तर प्रदेश के लिए सरदर्द बन सकते हैं और इस बात तो ध्यान ने रखते हुए यूपी सरकार ने भी ऐतिहात बरतना शुरू भी कर दिया है। इसी क्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में पाॅजिटिव केसे बढ़ रहे हैं, इसलिए सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाली प्रमुख ट्रेनों, हवाई जहाज और बसों के यात्रियों का भी रैण्डम आधार पर एंटीजन टेस्ट किया जाये। उन्होंने प्रमुख रेलवे स्टेशनों में कोविड हेल्प डेस्क स्थापित कर प्रमुख ट्रेनों से उतरने वाली सवारियों की रैण्डम टेस्टिंग करने के लिए जरूरी इंतजाम करने के भी निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में समीक्षा बैठक की। बैठक में वीडियो काॅन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डाॅ रजनीश दुबे, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य आलोक कुमार, सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
तिवारी ने कहा कि पांच प्रतिशत या उससे ज़्यादा पाॅजिटिव केसेज वाले जिलों में टेस्टिंग टारगेट्स की समीक्षा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में ज़्यादा संख्या में पाॅजिटिव केसेज आ रहे हैं, वहां काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग को बढ़ाया जाये और फोकस्ड टेस्टिंग की जाये।
उन्होंने कहा कि सभी कोविड अस्पतालों में पर्याप्त स्टाॅफ, दवायें, ऑक्सीजन, बेडों व अन्य जरूरी उपकरण व सामान आदि की उपलब्धता रहे और इसकी नियमित माॅनीटरिंग भी की जाये। इसके अलावा कोविड अस्पतालों में तैनात एवं राउंड पर जाने वाले डॉक्टरों का राउंड लेने का समय नोटिस बोर्ड में चस्पा किया जाये। सभी डॉक्टर अपने नाम का बैज भी लगायें, जिससे मरीज को यह पता रहे कि किस डॉक्टर ने कब विजिट किया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि डॉक्टर्स के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात पैरा मेडिकल स्टाॅफ भी अपने नाम का बैज लगायें। उन्होंने कहा कि सभी कोविड हाॅस्पीटल्स में अलग से एक-एक अधिकारी तैनात किया जाये, जो कि सीसीटीवी फुटेज व वीडियो रिकाॅर्डिंग को चेक कर नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट दे कि डाॅक्टर्स एवं पैरा मेडिकल स्टाॅफ द्वारा निर्धारित प्रोटोकाॅल एवं जरूरत के अनुसार मरीज को देख रहे हैं, इससे मरीज को भी संतुष्टि होगी।
तिवारी ने कहा कि जिन जिलों से ज़्यादा पाॅजिटिव मामले आ रहे हैं, उनकी गूगल मैपिंग भी कराई जाये और कांटेक्ट ट्रेसिंग बढ़ाकर फोकस्ड टेस्टिंग पर ज़ोर दिया जाये। संक्रमण की वजह से मौत के मामलों की समीक्षा करते हुये उन्होंने कहा कि मृत्यु के सभी प्रकरणों का सर्विलांस चेक कराया जाये। जिन जिलों में मौत के मामले ज्यादा आ रहे हैं, उनकी अलग से समीक्षा की जाये। मेरठ में मृत्यु के मामलों में गंभीरता से लेते हुये उन्होंने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य आलोक कुमार के नेतृत्व में टीम भेजने के निर्देश देते हुये कहा कि टीम मेरठ जाकर मौके पर समीक्षा करे और नर्सिंग होम संचालकों के साथ भी बैठक कर स्थिति की समीक्षा करे।





