लखनऊ में संक्रमण के दो नए मामले, कुल संख्या 183 पहुंची
संक्रमित लोगों की कुल संख्या हुई 1412, 1224 एक्टिव केस
10 जिलों में एक भी एक्टिव केस नहीं, फिर भी सावधानी बरतने के निर्देश
इन जिलों में लगातार सावधानी और सैंपलिंग के निर्देश, संक्रमण वापस न आने पाए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। बुधवार को प्रदेश के 53 जिलों से संक्रमण के 75 नए मामले सामने आये, जबकि इस वैश्विक महामारी से अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में कुल संक्रमण के मामले 1412 हो गए हैं, जिसमे से 1226 एक्टिव केसेस है। यूपी में अब तक 165 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो कर अपने घर वापस जा चुके हैं। बुधवार को राजधानी लखनऊ कोरोना दो नए मामले सामने आये हैं, जिसके बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 181 हो गयी है। बुधवार को जो मरीज संक्रमित पाया गया है वह सीतापुर में लैब तकनीशियन के पद पर तैनात था।
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि 53 जिलों में से 10 जनपदों संक्रमण मुक्त हो गए हैं और अब वहां कोरोना का एक भी एक्टिव केस नहीं है। 10 जिले जिनमे एक भी एक्टिव केस नहीं है उनमे पीली•ाीत, लखीमपुर खीरी, बरेली, हाथरस, बाराबंकी, हरदोई, शाहजहांपुर, प्रयागराज, मोहनलालगंज और महराजगंज शामिल हैं।
प्रसाद ने कहा कि लेकिन जिन जिलों में एक भी एक्टिव केस नहीं है वहां भी बहुत ज्यादा सावधान रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह संक्रमण बहुत ही मुश्किल है और कभी भी लौट कर आ सकता है। इसलिए वहां निर्देश दिए गए हैं की लगातार सैंपलिंग करनी है और नजर रखनी है, जिससे यह संक्रमण वापस लौट के न आ पाए। उन्होंने कहा कि पूल टेस्टिंग का काम लगातार चल रहा है। देश में पूल टेस्टिंग का काम सबसे पहले उत्तर प्रदेश में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ ने शुरू किया था और अब यह मेरठ मेडिकल कॉलेज और इटावा में भी शुरू हो गयी है। उन्होंने बताया कि पूल टेस्टिंग की व्यवस्था जल्द ही प्रयागराज और झांसी मेडिकल कॉलेजों में भी शुरू होने वाली है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि जो तीन टियर वाली व्यवस्था बनायीं गयी है उसमे सारे स्टाफ जिसमे डॉक्टर से लेकर के, पैरा मेडिकल, नर्स, वार्डबॉय और सफाई कर्मचारी शामिल हैं उनको तीन चरणों में इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर संक्रमित लोगों का इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी के अलावा प्राइवेट सेक्टर की भी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। सभी प्राइवेट और राजकीय सेक्टर स्तर पर जो भी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज हैं उनसे अनुरोध किया गया है कि जो भी इलाज किया जा रहा है वह पूरे प्रोटोकॉल के साथ किया जाए, ताकि संक्रमण की संभावना न रहे।
प्रसाद ने कहा कि संक्रमित लोगों का जो पहला और सबसे बड़ा जथा आया वह तबलीगी जमात या उनसे जुड़े लोगों का था। दूसरा जो चिकित्सा संसथान हैं जहां भी जो संक्रमण हुआ, वहां से हमने देखा की बहुत ज्यादा लोग संक्रमित होते हैं। इसीलिए उनको लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है और उनसे अनुरोध किया गया है कि ट्रेनिंग के साथ, उपकरणों के साथ जो प्रोटोकॉल है उसके अनुसार ही इस काम को करें। उन्होंने कहा कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण का नो तो कोई वैक्सीन है और न ही कोई दवा, इसलिए लोगों से लगातार अनुरोध किया जा रहा है कि वह सावधानी बरते। सावधानी ही इस संक्रमण का इलाज है और वही बचाव का सबसे कारगर तरीका है।





