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महाशक्ति का गौरव

अखण्ड राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ चुके भारत ने गुरुवार को 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। आजादी के पहले देश का नक्शा और अधिक विस्तृत था जो विभाजन और बाद के युद्धों में सिमटता गया। किसी राष्ट्र के लिए इससे अधिक अपमान जनक और क्या हो सकता है कि बलपूर्वक उसकी सीमाएं बदल दी जाएं। राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान जब भारत आजाद दुनिया में अपना मुकाम हासिल करने का ख्वाब देख ही रहा था तो 15 अगस्त 1947 से ठीक एक दिन पहले विभाजन और साम्प्रदायिक हिंसा का जख्म देश को झेलना पड़ा। 1948 में पाकिस्तान ने कश्मीर का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा कब्जा लिया और 1962 के युद्ध में चीन ने भारत के बड़े भूभाग को कब्जा कर लिया। अन्तर्राष्ट्रीय साजिश, युद्ध, जय-पराजय, कूटनीतिक सफलता-असफलता के टेढे-मेढे रास्तों से आगे बढ़ता हुआ 2019 का भारत उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां उसके पास विपुल आर्थिक संसाधन, विशाल सैन्य शक्ति, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सक्षम व निर्णायक नेतृत्व सब कुछ है। सात दशक की विकास यात्रा के बाद देश को यह मुकाम हासिल हुआ है।

 

 

आज भारत को किसी देश की धमकियों, कूटनीतिक विरोधों, अंतर्राष्ट्रीय साजिशों या छोटी-मोटी आर्थिक पाबंदियों से डरने की जरूरत नहीं, लेकिन हमारी चुनौतियां भी बहुत जटिल हैं। अगले एक दशक में भारत किस मुकाम पर होगा, यह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि देश अपने आंतरिक मसलों को कैसे सुलझाता है। देश के सामने बेतहाशा बढ़ती आबादी, बेरोजगार नौजवान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विशेषकर उद्यमिता और स्किल्ड एजुकेशन की कमी, कुपोषण, बीमारी, राष्ट्रीय विकास में सभी वर्ग व लिंगों की समान भागीदारी न होना और ग्लोबल वार्मिक व पर्यावरण का संकट बड़ी चुनौतियां हैं। ये चुनौतियां न सिर्फ हमारे विकास को बाधित करती हैं बल्कि राष्ट्र अपने साझा प्रयासों से जो कुछ प्रगति दर्ज भी करता है, उसको भी निष्फल बना देती हैं। राष्ट्रहित, कानून द्वारा कुप्रथाओं के शमन, सामाजिक और व्यापक लैंगिंग समानता जैसे मुद्दों पर घरेलू राजनीतिक चिकचिक भी एक समस्या ही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सक्षम व निर्णायक नेतृत्व के एक बेहतरीन दौर में है। ऐसे में ये चुनौतियां इतनी बड़ी नहीं हैं जिनका समाधान नहीं हो सकता है।

 

पिछले तीन सप्ताह में इस देश ने तीन ऐसे कार्य किये जो ऐतिहासिक महत्व के साथ सामाजिक, राजनीतिक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिक और कूटनीति के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन के वाहक बनेंगे। 22 जुलाई को चन्द्रयान-2 ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी, 29 जुलाई को नारी गरिमा को प्रतिष्ठित करने वाले तीन तलाक बिल को संसद ने स्वीकृति दी और 5 अगस्त को राष्ट्रीय एकीकरण में खलल डालने वाले कानून को निष्प्रभावी किया गया। यह सही है कि जब हम स्वतंत्रता दिवस बना रहे हैं, ठीक उसी समय देश बाढ़, आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और आतंरिक मोर्चे के साथ सीमा पर चुनौती का सामना कर रहा है। लेकिन इन चुनौतियों से संकल्प बाधित नहीं होते। भारत को अगले एक दशक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सैनिक एवं आर्थिक क्षेत्र में महाशक्ति बनने की दिशा में संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

 

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