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प्रदेश में 18 जिलों के 672 गांवों बाढ़ से प्रभावित : अनिल राजभर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शारदा नदी, पलियाकलां, लखीमपुर खीरी, सरयू नदी, तुर्तीपार, बलिया, राप्ती नदी बर्डघाट गोरखपुर, सरयू (घाघरा) नदी एल्गिनब्रिज बाराबंकी और अयोध्या में अपने खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है। इसके चलते बाढ़ से प्रभावित होने वाले जिलों की संख्या अब बढ़ रही है।

इस समय में प्रदेश के 18 जिलों के 672 गांवों बाढ़ से प्रभावित है। प्रभावित होने वाले जिलों में आंबेडकर नगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, गोरखपुर, कुशीनगर, लखीमपुरखीरी, मऊ, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, देवरिया, संतकबीरनगर और सीतापुर शामिल हैं।

प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री अनिल राजभर ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया की मुख्यमंत्री योग आदित्यनाथ के निर्देशानुसार बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर एवं बाराबंकी जिलों में उन्होंने जलशक्ति राज्यमंत्री बलदेव औलख व अपर मुख्य सचिव सिंचाई के साथ बाढ़ राहत कार्य, स्वास्थ्य, बचाव दल की उपलब्धता तथा बाढ़ के संबंध में सभी तैयारियों के बारे में जिलाधिकारी और जनपद के अन्य अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा की गई और प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय भी निरीक्षण किया।

राजभर ने बताया कि मुख्यमंत्री जी द्वारा बाढ़ राहत कार्यों हेतु निर्देश दिये गये हैं कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में विषैले सर्प कीटों का प्रकोप काफी संख्या में रहता है जिनके काटने से काफी जनहानि व पशुहानि होती है।

बाढ़ राहत शरणालयों के आस-पास की झाड़ी की सफाई की जाय और रात्रि में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाय। जल बहाव के कटान से प्रभावित भूमि के समीप स्थित स्कूल व पंचायत भवनों में बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों के लिए शरणालय न बनाया जाय और ऐसे स्कूल व भवनों में कक्षाओं का संचालन न किया जाय।

मंत्री ने बताया कि बाराबंकी जिले में तटबंध में बांधों का लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिये गये है। किसी भी क्षतिग्रस्त बंधे को तुरंत ठीक करा लिया जाये और बाढ़ चौकियों एवं कंट्रोल रूम को हाई अलर्ट पर रखा जाए।

क्षतिग्रस्त नावों का इस्तेमाल ना किया जाये और राहत सामग्री का वितरण उपयुक्त लाभार्थियों को किया जाये। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के संबंधित जनप्रतिनिधियों से समन्वय बैठाते हुए उन्हें लगातार प्रभावित गांवों एवं तटबंध की यथा स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पशुओं का टीकाकरण एवं चारा व भूसा की व्यवस्था एवं उनके देखरेख की समुचित व्यवस्था कर ली जाये। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे बच्चे बुजुर्ग एवं महिलाओं का विशेष ध्यान रखते हुए उन लोगों की दवा एवं वैक्सीन का उचित व्यवस्था कर ली जाए और सर्पदंश एवं जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था कर ली जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ज़रुरत के हिसाब से एनडीआरएफ एवं पीएसी और युवा सहायता दल की भी व्यवस्था कर ली जाये।

राजभर ने कहा कि बहराइच में निर्देश दिये गये हैं कि बाढ सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाएं पहले की तरह चलाने के साथ-साथ, बाढ़ राहत संबंधी सभी व्यवस्था एनडीआरएफ सहित सभी टीमों को सक्रिय रखा जाये।

बाढ़ प्रभावी समस्त गांवों में स्वास्थ शिविर का आयोजन किया जाये और उपचारित व्यक्तियों व दी गई दवाइयों का विवरण कर रक्षित रखा जाए। जिले के 110 किलोमीटर तटबन्ध की लगातार निगरानी की जाये और किसी तरह की सीपेज या अन्य प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत मरम्मत की जाये।

मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी में कटान व संवेदनशील स्थल चिन्हित करना और 24 घंटे पेट्रोलिंग करना व निगरानी रखने के निर्देश दिये गये हैं। बाढ़ का पानी कम होने पर फसलों के नुकसान का आंकलन करना एवं प्रभावित किसानों के मध्य राहत धनराशि का वितरण किया जाये।

बाढ़/कटान से कैसे बचा जाए और उसके प्रभाव को कैसे कम किया जाए, उसके अगले 45 दिन की कार्ययोजना बनाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं।

राजभर ने बताया कि गोंडा में मिली सूचना के अनुसार सुबह 3 बजे सकरौर भिखारीपुर तटबंध 17.590 किलोमीटर से 17.780 किमी के बीच 60 मीटर की लंबाई में कट गया।

उस स्थल पर नदी के जलस्तर में कमी आ गयी है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मिली सूचना के अनुसार रिंग बांध बनाने का कार्य प्रगति पर है।

उन्होंने बताया कि जनपद बलरामपुर के बलरामपुर-भडरिया तटबंध में राप्ती नदी के दायें तट पर स्थित चन्दापुर गांव के पास कटान स्थल पर बम्बूक्रेट, नायलान क्रेट में मिट्टी भरी बोरियों को रख कर कटान को नियंत्रण करने का कार्य कराये जा रहे है।

राजभर ने बताया कि प्रदेश के मौजूदा समय में सभी तटबंध सुरक्षित है। प्रदेश में बाढ़ के बारे में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक परिस्थिति नहीं है।

प्रदेश के प्रभावित जनपदों में सर्च एवं रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ की 15 टीमें और एसडीआरएफ व पीएसी की 07 टीमें इस प्रकार कुल 22 टीमें तैनाती की गयी है। 780 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगायी गयी है।

 

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