लखनऊ। उत्तर प्रदेश में फिलहाल कोरोना संक्रमण की रफ़्तार फिलहाल सुस्त होती नजर आ रही है और इसके साथ ही एक्टिव मामलों की संख्या भी घटती लग रही है। सोमवार को प्रदेश के 72 जिलों में 53 और लोग संक्रमत पाए गए हैं, जिसके बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 3520 पहुंच गयी है।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के साथ संयुक्त प्रेससवार्ता में बताया कि प्रदेश के 64 जनपदों में 1786 मामले एक्टिव हैं। अब तक 1655 मरीज पूरी तरह से उपचारित हो चुके हैं। रविवार को 316 पूल टेस्ट के माध्यम से 1580 सैम्पल टेस्ट किये गये जिसमें से 33 पूल पॉजीटिव पाये गये।
प्रसाद ने कहा कि इस समय 1830 लोगों को आइसोलेशन वार्ड में और 8952 लोगों को फैसिलिटी क्वारेंटाइन में रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग लैब की संख्या बढ़कर 26 हो गयी है। कोरोना टेस्टिंग के लिए अब तक 1,30,893 लोगों के सैम्पल टेस्ट किये गये, जिसमें से 1,27,373 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्होंने बताया कि एक समानान्तर व्यवस्था भी की गई है। जो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, उन्हें लगातार हमारे नियंत्रण कक्ष से फोन किया जा रहा है। अब तक 2058 ऐसे लोगों को फोन किया जा चुका है और उनमें से नौ कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए हैं। इस समय उनका अस् ताल में इलाज चल रहा है ।
प्रमुख सचिव ने कहा कि बाकी लोगों को हम नियंत्रण कक्ष के माध्यम से बता रहे हैं कि वे सावधान रहें। अपनी सेहत का लगातार मूल्यांकन करें। ढेर सारे लोगों ने बताया कि उनकी तबियत अब ठीक है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हेल्पलाइन लाइन नंबर पर फोन किया जा सकता है, जहां खांसी, सांस लेने में दिक्कत या बुखार जैसे लक्षणों को लेकर सलाह ले सकते हैं। जरूरत पड़ी तो विशेषज्ञ बताएंगे कि जाकर जांच कराइए और अगर संक्रमण पाया गया तो चिकित्सा की व्यवस्था भी होगी। जांच और चिकित्सा की व्यवस्था सरकार की ओर से मुफ्त की गई है ।
प्रसाद ने कहा कि इस समय काफी संख्या में प्रवासी कामगार दूसरे में आ रहे हैं। ऐसे प्रदेशों से भी कामगार आ रहे हैं, जहां संक्रमण फैला हुआ है। कुछ लोगों के संक्रमित होने की सूचना भी आ रही है। इसके लिए हमने जो सार्वजनिक निगरानी का माडल दिया है, उसका बहुत सही उपयोग होना चाहिए। गांवों में ग्राम निगरानी समितियां हैं जो ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में बनी हैं, जबकि शहरों में सभासद की अध्यक्षता में मोहल्ला निगरानी समितियां बनाई गई हैं। इन्हें मजबूती से काम करना है ताकि जो भी बाहर से आ रहे हैं, घर पर क्वारंटाइन में कडाई से रहें। जिनमें लक्षण आ रहे हों, उनका जांच कराकर, अगर संक्रमण है तो अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। अगर संक्रमण नहीं है तो सात दिन क्वारंटाइन करके, फिर परीक्षण कराकर 14 दिन के लिए होम क्वारंटाइन में भेजा जा रहा है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि कोई भी प्रवासी रेलवे स्टेशन से सीधे घर नहीं भेजा जाएगा। पहले आश्रय स्थल ले जाएंगे। लक्षण रहित होने पर 21 दिन के लिए होम क्वारंटाइन में रखा जाएगा। ऐसे में कम्युनिटी सर्विलांस बहुत आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि साबुन पानी से बार बार हाथ धोते रहिए। मुंह और नाक को फेसकवर जैसे गमछे, मास्क या रूमाल से ढंकें, एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के नियम का पूरा पालन करें। दो गज की दूरी बनाएं और बेवजह घर से ना निकलें। इन बातों का पालन करके ही हम अपने आप को बचा सकते हैं । बचाव ही एकमात्र रस्ता है इसलिए सबको ध्यान देना चाहिए।





