श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। रामनगर क्षेत्र में सोमवार सुबह यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई, जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा सुबह करीब 10 बजे एक पहाड़ी सड़क पर खतरनाक मोड़ के पास हुआ, जहां वाहन संतुलन खो बैठा और सीधे खाई में जा गिरा।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बस दूरदराज के एक गांव से उधमपुर की ओर जा रही थी। हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया, जिसके बाद पुलिस, सेना और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की भी तैयारी की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने उधमपुर के जिला अधिकारी से बात की है और राहत कार्य तेजी से जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और प्रशासन पूरी तरह से स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्री ने यह भी कहा कि स्थानीय प्रशासन और कार्यकर्ताओं की टीम लगातार समन्वय में काम कर रही है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की कमी न रहे।
यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जम्मू-कश्मीर के कई जिले जैसे पुंछ, राजौरी, रामबन, डोडा और किश्तवाड़ अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क हादसों के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। यहां की सड़कें संकरी, ढलानदार और तीखे मोड़ों से भरी होती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
पिछले कुछ महीनों में भी इस क्षेत्र में कई दुखद हादसे हो चुके हैं। बीते महीने राजौरी जिले के कल्लर इलाके में हुए एक हादसे में एक महिला प्रोफेसर की जान चली गई थी, जबकि उनके पति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं गांदरबल जिले में एक अन्य सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इससे पहले जनवरी में डोडा जिले में एक भीषण हादसे में दस सैनिकों की जान चली गई थी।
इन लगातार हो रहे हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क निर्माण, नियमित वाहन जांच, और ड्राइवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण जैसे कदम उठाए जाने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल उधमपुर हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है और हादसे की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।





