भातखण्डे में चार दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में 27 से 30 जुलाई तक आयोजित चार दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ आज प्रथम दिवस पर विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित पंडित बिरजू महाराज पीठ के अंतर्गत नृत्य विभाग द्वारा आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का संचालन प्रख्यात कथक विशेषज्ञ पंडित जयंत कस्तुआर द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. माँडवी सिंह द्वारा पंडित जयंत कस्तुआर को पारंपरिक रूप से अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर गरिमामय ढंग से किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ गुरु पंडित राम मोहन महाराज, विभागाध्यक्ष (गायन) प्रो. सृष्टि माथुर, विभागाध्यक्ष (नृत्य) एवं कार्यशाला संयोजक ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी, सहायक आचार्य (नृत्य) श्रीमती मंजुला पंत एवं डॉ. रुचि खरे सहित संगतकर्ता एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी बना रहा।
सर्वप्रथम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके समक्ष एक अत्यंत गुणी, विद्वान एवं अनुभवी कलाकार उपस्थित हैं, जिनसे सीखना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाएं और समर्पण भाव से शिक्षा ग्रहण करें।
तत्पश्चात पंडित जयंत कस्तुआर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नृत्य की अनेक सूक्ष्म बारीकियों का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नृत्य कला में सिद्धि प्राप्त करने के लिए नियमित साधना (रियाज) अत्यंत आवश्यक है। अपने जीवन के विविध अनुभव साझा करते हुए वे गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर भावुक हो उठे और उन्होंने बताया कि गुरु के सान्निध्य में रहकर ही कला का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कथक नृत्य तभी पूर्णता प्राप्त करता है, जब उसके साथ संगत करने वाली विधाओं में भी दक्षता हो। इसके अतिरिक्त उन्होंने विद्यार्थियों को कथक की मूलभूत तकनीकों, हस्त-मुद्राओं, पाद-संचालन (तत्कार) तथा लय-ताल की सूक्ष्म बारीकियों का अभ्यास कराया।
कार्यशाला का आयोजन प्रतिदिन दो सत्रों में सम्पन्न किया जा रहा है, जिसमें प्रात: एवं अपराह्न सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को सिद्धांत एवं व्यवहार दोनों का समुचित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
पंडित जयंत कस्तुआर भारत के प्रतिष्ठित कथक नर्तक एवं कला विशेषज्ञ हैं, जिन्हें कथक नृत्य शैली के उत्कृष्ट प्रतिनिधियों में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने कथक का प्रारंभिक प्रशिक्षण गुरु इंद्र कुमार पटनायक से प्राप्त किया तथा तत्पश्चात जयपुर घराने के महान नर्तक पंडित दुर्गा लाल से उच्चस्तरीय प्रशिक्षण ग्रहण किया। वे उनकी पारंपरिक एकल नृत्य शैली के प्रमुख संवाहक माने जाते हैं। पंडित कस्तुआर संगीत नाटक अकादमी के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें बिहार सरकार द्वारा ह्यविशिष्ट बिहारी सम्मानह्ण तथा ह्यरसेश्वर सैकिया बरबायन पुरस्कारह्ण से सम्मानित किया जा चुका है।





