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रक्षा बंधन 28 को, नहीं रहेगा भद्रा का साया

लखनऊ। हिंदू धर्म में रक्षा बंधन या राखी का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हर साल सावन पूर्णिमा के इसे मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधती हैं और उनकी खुशहाली की कामना करती हैं। बदले में भाई बहन की उम्र भर रक्षा का वादा देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व कभी भी भद्रा के साये में नहीं मनाना चाहिए। राखी बांधने के लिए भद्रा रहित मुहूर्त ही लाभकारी होता है। इस साल लोगों के बीच सावन पूर्णिमा पर लगने वाले चंद्रग्रहण के कारण रक्षा बंधन की तारीख को लेकर भम्र की स्थिति है। पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 09 मिनट पर प्रारंभ होगी और 28 अगस्त को सुबह 09 बजकर 49 मिनट पर समापन होगा। उदया तिथि मान्य होने के कारण सावन पूर्णिमा का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म ग्रंथों में भद्रा काल में राखी बांधना पूर्ण रूप से वर्जित है। मान्यता है कि भद्राकाल में राखी बांधने से भाई-बहन को शुभ फल नहीं मिलते हैं। इस बार रक्षा बंधन के दिन यानी 28 अगस्त को भद्रा का साया नहीं रहेगा। सावन पूर्णिमा की शुरूआत 27 अगस्त से हो रही है। भद्रा 27 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इस तरह से 28 अगस्त को भद्रा नहीं रहेगी और रक्षा बंधन का पर्व बिना किसी चिंता के मनाया जा सकेगा।

रक्षा बंधन पर राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त
रक्षा बंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। मान्यता है कि भद्रा, राहुकाल या पंचक के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए, वरना अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। रक्षा बंधन पर राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

राखी बांधते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय भाई का पूर्व दिशा की ओर मुख होना चाहिए। बहन को भाई की आरती जरूर उतारनी चाहिए। भाई को बहन के पांव छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इस दिन भाई-बहन को अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। रक्षा बंधन के दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

रक्षा बंधन से जुड़ी पौराणिक कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां लक्ष्मी ने सबसे पहले रक्षा सूत्र राजा बलि को बांधा था। इस पर्व का संबंध महाभारत काल से भी मिलता है। कहा जाता है कि द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को राखी बांधी थी। भगवान कृष्ण भी भाई का फर्ज निभाते हुए द्रौपदी की लाज बचाने पहुंचे थे।

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