लखनऊ। टीवी और फिल्म अभिनेता अंकुर नैय्यर जो ‘कसौटी जिÞंदगी की’ ‘झांसी की रानी’, तू आशिकी और ‘पांड्या स्टोर’ जैसे कई लोकप्रिय शोज का हिस्सा रह चुके हैं, इस खास बातचीत में उन्होंने अपने करियर, नए बिजनेस और निजी जिंदगी से जुड़ी कई बातें साझा कीं।
आपने टेलीविजन से लेकर फिल्मों तक कई अलग-अलग किरदार निभाए हैं. अपने अब तक के सफर को आप किस तरह देखते हैं?
मेरा अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है. मुझे हमेशा अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिला चाहे वो ‘कसौटी जिÞंदगी की’ की हो, ‘झांसी की रानी’ की हो, या ‘पांड्या स्टोर’ की. हर किरदार ने मुझे कुछ नया सिखाया और एक अभिनेता के तौर पर यही सबसे बड़ी खुशी होती है कि आपको खुद को बार-बार नए रूप में पेश करने का मौका मिले।
अब तक निभाए गए आपके सभी किरदारों में कौन-सा किरदार आपके दिल के सबसे करीब है और क्यों?
महाराणा प्रताप में निभाया गया गुरु का किरदार मेरे दिल के सबसे करीब है. इस शो में शुद्ध हिंदी बोलनी पड़ती थी और उस भाषा की गरिमा बनाए रखना आसान नहीं था. शुरूआत में मेहनत करनी पड़ी, लेकिन धीरे-धीरे मैं उस किरदार में पूरी तरह ढल गया. इसके अलावा तू आशिकी का किरदार भी मुझे बेहद पसंद है क्योंकि उसमें मुझे काफी इम्प्रोवाइज करने की आजादी मिली थी. पांड्या स्टोर और सावधान इंडिया के अनुभव भी मेरे लिए हमेशा यादगार रहेंगे।
टीवी और फिल्मों में काम करने का सबसे बड़ा अंतर क्या है?
सिंघम जैसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनना अपने आप में शानदार अनुभव था. हालांकि उसमें मेरा रोल सीमित था, इसलिए मुझे अपने अभिनय को ज्यादा दिखाने का मौका नहीं मिला. मेरे लिए किसी भी माध्यम से ज्यादा जरूरी यह है कि एक कलाकार के तौर पर मुझे कहानी में योगदान देने और अभिनय करने का अच्छा अवसर मिले।
एक्टिंग के साथ आपने मुंबई के अंधेरी वेस्ट में अपना कैफे भी शुरू किया है. इसकी शुरूआत कैसे हुई?
मुझे हमेशा से हेल्दी फूड में दिलचस्पी रही है. हम चाहते थे कि लोगों को टेस्टी और हेल्दी खाना सही कीमत पर मिले. अक्सर लोग सोचते हैं कि हेल्दी खाना हमेशा महंगा होता है, लेकिन हमने इसी सोच को बदलने की कोशिश की है. मेरा मानना है कि अच्छा और पौष्टिक खाना हर किसी की पहुंच में होना चाहिए।
आपके कैफे की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
एस्प्रेसो, द आर्ट कैफे की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां मैदा और रिफाइंड शुगर का इस्तेमाल नहीं किया जाता. हम गेहूं, ज्वार और शकरकंद के आटे का उपयोग करते हैं. वहीं, मिठास के लिए चीनी की जगह गुड़ जैसी हेल्दी चीजों का इस्तेमाल करते हैं. हमारे कैफे का मकसद है कि लोग बिना किसी समझौते के हेल्दी, पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना खा सकें।
आपने सावधान इंडिया में भी लंबे समय तक काम किया. उस अनुभव को कैसे याद करते हैं?
वह मेरे करियर का बेहद खास अनुभव रहा. लॉकडाउन के दौरान मैंने लगातार कई महीनों तक अलग-अलग किरदार निभाए. हर एपिसोड में नई कहानी और नया किरदार होता था, इसलिए हर दिन एक नई चुनौती और कुछ नया सीखने का मौका मिलता था. एक कलाकार के तौर पर इस अनुभव ने मुझे काफी कुछ सिखाया और मेरी एक्टिंग को भी बेहतर बनाया।
क्या आपको लगता है कि एक अभिनेता के लिए केवल बड़े बैनर की फिल्म करना ही सफलता की निशानी है?
बिल्कुल नहीं. मेरे लिए सबसे जरूरी यह है कि एक कलाकार के तौर पर मुझे अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिले. चाहे फिल्म हो, टीवी हो या ओटीटी, अगर मेरा किरदार कहानी में योगदान दे रहा है, तभी मुझे संतुष्टि मिलती है. बड़े सेट और बड़े प्रोजेक्ट्स का अनुभव शानदार होता है, लेकिन आखिर में एक अभिनेता के लिए सबसे अहम उसका किरदार होता है. अगर किरदार मजबूत है तो छोटा प्रोजेक्ट भी यादगार बन जाता है।
एक्टिंग और बिजनेस, दोनों को साथ लेकर चलना कितना मुश्किल है?
चुनौती तो जरूर होती है, लेकिन अगर आपकी टीम अच्छी हो, तो एक्टिंग और बिजनेस दोनों को आसानी से संभाला जा सकता है. मेरी पहली प्राथमिकता आज भी एक्टिंग ही है, लेकिन मेरा कैफे भी मेरे लिए एक पैशन प्रोजेक्ट है. मैं खाली बैठने में विश्वास नहीं रखता. अगर मेरे पास दो घंटे भी खाली हों, तो मैं उन्हें किसी नए काम या कुछ सीखने में लगाना पसंद करता हूं।





