मुंबई। फेडरेशन आॅफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोआॅपरेशन डायरेक्टिव को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का ऐलान किया है एफडब्ल्यूआईसीई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। संगठन ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में एकता, सहयोग और सौहार्द बनाए रखना सबसे जरूरी है। इसी उद्देश्य से मामले को बातचीत और आपसी समझ के जरिए सुलझाने का निर्णय लिया गया।
एफडब्ल्यूआईसीई के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने कहा कि एफडब्ल्यूआईसीई ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। अशोक पंडित ने कहा कि एफडब्ल्यूआईसीई के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है।
संगठन केवल नॉन-कोआॅपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निमार्ता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। एफडब्ल्यूआईसीई ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोआॅपरेशन जारी किया था, जिसके तहत संस्था ने अपने सभी सदस्यों से रणवीर के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने को कहा था।
यह पूरा विवाद रणवीर सिंह के फिल्म डॉन 3 से बाहर होने से जुड़ा था। इस फिल्म को फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रही थी। मामले में कहा गया कि फिल्म की तैयारियां पूरी होने और शूटिंग शुरू होने से मात्र तीन हफ्ते पहले रणवीर सिंह प्रोजेक्ट से बाहर हो गए। प्रोजेक्ट छोड़ने से हुए नुकसान के एवज में मेकर्स ने रणवीर से 45 करोड़ रुपए के हजार्ने की मांग की थी।





