उत्तराखण्ड की पारम्परिक बैठकी व खड़ी होली उत्सव
लखनऊ। उत्तराखंड महापरिषद, लखनऊ द्वारा विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी रविवार को महापरिषद प्रांगण (उत्तराखंड महापरिषद भवन, कुर्मांचल नगर, लखनऊ) में महिला एवं पुरुष होलियारों द्वारा उत्तराखंड की सुंदर पारम्परिक बैठकी व खड़ी होली उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। उत्तराखंड महापरिषद के तत्वावधान में आज होलीकोत्सव का भव्य एवं सांस्कृतिक आयोजन महापरिषद भवन में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति और रंगों के इस अनुपम पर्व में होलीयारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
महिला होलीयारों की सशक्त एवं सुरमयी टीमों ने कल्याणपुर, पंतनगर, विकासनगर, इंद्रानगर, तेलीबाग, सुगामऊ, महानगर तथा राजाजीपुरम सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुँचकर पारंपरिक बैठकी एवं खड़ी होली के गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। ढोल, दमाऊँ और बाजे-गाजे की मधुर थाप पर पूरा वातावरण रंग, रस और भक्ति में सराबोर हो उठा। होली के पारंपरिक गीतों – जोगी आयो शाहर में व्योपारी, शिव के मन माही बसे काशी, सिद्धी को दाता विघन विनाशक एवं रंग में होली कैसे खेलूगी सावरिया के संग की गूंज से महापरिषद भवन संस्कृति, एकता और सौहार्द का जीवंत प्रतीक बन गया। वरिष्ठजनों से लेकर युवा एवं बच्चों तक सभी ने मिलकर रंगोत्सव का आनंद लिया।
उत्तराखण्ड महापरिषद द्वारा इस होली उत्सव में पुरूष व महिला होलियारो द्वारा उत्तराखण्ड के ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों की पारम्परिक होली के उल्लास उमंग, आनन्द और ह्दयस्पर्शी अनुभूति का सजीव अनुभव कराया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अरूणा उपाध्याय, हरितिमा पंत, शशी जोशी, सुशीला नेगी, पुष्पा वैष्णव, कमला चुफाल, मीना अधिकारी, पूनम कनवाल, सविता बिष्ट, दीपा कालाकोटी, हेमा बिष्ट, मंजू पाण्डेय, सरोज खुलबे, पुष्पा गैलाकोटी, सुन्दर पाल सिंह बिष्ट, किशोर काठोरी, पान सिंह, दर्शन सिंह परिहार, सीएम जोशी, भुवन पाठक सभी होलीयारों ने उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपरा को जीवित रखने का संकल्प दोहराया और अपनी बोली – अपनी होली अपनी संस्कृति का संदेश दिया। यह आयोजन न केवल रंगों का उत्सव रहा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।





