नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर, डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में 1 रुपये प्रति किलो का इजाफा दर्ज किया गया है। बीते 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
अगर पिछले 10 दिनों का रिकॉर्ड देखें तो ईंधन की कीमतों में यह लगातार तीसरा बड़ा झटका है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में सीधे 3-3 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इसके ठीक बाद 19 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ था। इस लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते पिछले महज 10 दिनों में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 5 रुपये तक बढ़ चुकी हैं, जबकि इसी अवधि में सीएनजी के दाम भी दूसरी बार बढ़ाए गए हैं।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये से बढ़कर अब 99.51 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वहीं, डीजल का दाम भी 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके अलावा, घरेलू और कमर्शियल वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की कीमत भी अब बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है, जिससे आने वाले दिनों में मालभाड़ा और ऑटो-कैब का किराया बढ़ने की आशंका है।
लगातार बढ़ रही तेल की कीमतों को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री को ‘महंगाई मैन’ करार दिया और कहा कि मोदी सरकार ने महज 9 दिनों में पेट्रोल-डीजल पर 5 रुपये बढ़ा दिए हैं। आज फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर जनता की जेब काटी गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को सिर्फ तेल कंपनियों और पूंजीपतियों के मुनाफे की चिंता है। जहां दुनिया भर की सरकारें अपनी जनता को राहत दे रही हैं, वहीं मोदी सरकार देश की जनता को लूटने में लगी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में आई तेजी है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बने अनिश्चित माहौल के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की इस तेजी का सीधा और बड़ा असर घरेलू बाजार में ईंधन के दामों पर पड़ रहा है।





