नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी गतिरोध लगातार बना हुआ है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि इस वर्ष कुछ घटनाएं बहुत विचलित करने वाली हुई है। उन्होंने अपने रुख के चलते कुछ बुनियादी चिंताओं को उठाया है। दूसरे पक्ष ने उन समझौतों का पालन नहीं किया है। विदेश मंत्री से पूछा गया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध जल्द खत्म हो जाएगा या लंबा खिंचेगा, इस पर उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं करूंगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि एलएसी पर जो कुछ हुआ है, वह किसी भी लिहाज से चीन के हित में नहीं है। इस गतिरोध के चलते लोगों की भावना पर प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही जयशंकर ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान हो और वहां गतिविधियों पर नजर रखी जा सके इसीलिए हम वहां मौजूद हैं। बता दें कि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि चीन की तैनाती से दोनों देशों के संबंधों और समझौतों को गंभीर नुकसान हुआ है। बीते 30-40 वर्षों का यह सबसे मुश्किल दौर है।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘यह हमारे धैर्य की परीक्षा हो रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती से अच्छी तरह निपट लेंगे।’ जयशंकर ने ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट के आॅनलाइन कार्यक्रम में यह भी कहा था कि चीन ने एलएसी पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती के लिए पांच विरोधाभासी कारण बताए हैं। सीमा पर अशांति है जिसके चलते बाकी क्षेत्रों में संबंध आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
उन्होंने साफ कहा था कि मौजूदा हालात में भी (चीन) यदि संबंध बढ़ाने की सोचता है, तो यह उसकी गैर वाजिब सोच होगी। उधर, विदेश मंत्री के आज के बयान से पहले भारत ने शुक्रवार को कहा था कि बीत 6 महीने से पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य गतिरोध चीन की उकसावे वाली कार्रवाइयों का परिणाम है. चीन ने एलएसी पर स्थिति को “एकतरफा ढंग से बदलने” की कोशिश की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि ये द्विपक्षीय संबंधों तथा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है.





