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इंटरनेशनल सेक्स ट्रैफिकिंग सिंडिकेट की कथित सरगना लोला कायूमोवा गिरफ्तार, 7 बार कराई प्लास्टिक सर्जरी, फर्जी दस्तावेजों से छिपाई पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विदेशी महिलाओं से जुड़े कथित सेक्स और मानव तस्करी नेटवर्क की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब एक साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तान की नागरिक लोला कायूमोवा को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने उसे ट्रेस कर हिरासत में लिया और बाद में लखनऊ पुलिस को सौंप दिया।पुलिस जांच में आरोप है कि लोला विदेशी महिलाओं को भारत लाकर उन्हें लखनऊ में ठहराती थी और कथित तौर पर देह व्यापार के नेटवर्क का संचालन करती थी। एजेंसियां अब उसके पूरे नेटवर्क, विदेशों से महिलाओं को लाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और पहचान बदलने में मदद करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। पुलिस को उज्बेकिस्तान और नेपाल से जुड़े नेटवर्क के भी सुराग मिले हैं।

एक साल से पुलिस को चकमा दे रही थी लोला

लोला कायूमोवा के खिलाफ जांच जून 2025 में शुरू हुई थी। उस समय लखनऊ के एक हाई-प्रोफाइल अपार्टमेंट से दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं होलीदा और निलोफर को पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों महिलाओं से पूछताछ के बाद लोला का नाम सामने आया और उसे कथित नेटवर्क की मुख्य संचालक के तौर पर चिन्हित किया गया।इसके बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उसकी तलाश शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, उज्बेकिस्तान में भी उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने की जानकारी जांच में सामने आई थी।करीब एक साल तक फरार रहने के बाद आखिरकार एजेंसियां उसके ठिकाने तक पहुंचने में सफल रहीं।

सात बार कराई प्लास्टिक सर्जरी!

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू लोला की पहचान बदलने से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने अपनी उम्र और पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर सात बार प्लास्टिक सर्जरी कराई थी। 2025 में सामने आई जांच रिपोर्टों के मुताबिक, 49 वर्षीय लोला खुद को करीब 29 साल की दिखाने की कोशिश करती थी और एक हाई-प्रोफाइल “NRI सोशलाइट” के रूप में अपनी पहचान पेश करती थी। उसके चेहरे और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं कराए जाने की बात सामने आई थी।पुलिस को संदेह है कि बदला हुआ हुलिया उसकी पहचान छिपाने और लंबे समय तक एजेंसियों की नजर से बचने में मददगार रहा।

विदेशी महिलाओं को नेपाल के रास्ते भारत लाने का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, लोला पर उज्बेकिस्तान और नेपाल से जुड़े नेटवर्क के जरिए महिलाओं को भारत लाने का आरोप है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन महिलाओं को भारत लाने के लिए किस तरह के दस्तावेजों और संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था।ताजा जांच में एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि नेटवर्क में केवल लोला ही शामिल थी या उसके साथ कई अन्य लोग भी सक्रिय थे। महिलाओं के आने-जाने, उनके ठहरने और ग्राहकों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था कौन संभालता था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

लग्जरी अपार्टमेंट में ठहराई जाती थीं विदेशी महिलाएं

पुलिस के अनुसार, नेटवर्क से जुड़ी महिलाओं को लखनऊ के हाई-एंड इलाकों में स्थित अपार्टमेंट्स में ठहराया जाता था। जून 2025 में हुई कार्रवाई के दौरान ऐसी ही एक जगह से होलीदा और निलोफर को पकड़ा गया था।जांच में आरोप सामने आया कि महिलाओं के रहने से लेकर ग्राहकों तक पहुंचाने और अन्य व्यवस्थाओं पर लोला का नियंत्रण था। पुलिस अब उन सभी फ्लैट्स और लोगों की जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल कथित नेटवर्क के लिए किया गया।

फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट से तैयार कराए भारतीय दस्तावेज

लोला ने भारत में अपनी पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। जांच में सामने आया कि उसने एक फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने की कोशिश की।रिपोर्टों के मुताबिक, उसने जिस व्यक्ति को दस्तावेजों में अपना पति बताया था, वह वास्तव में उसका ग्राहक था और बाद में कथित तौर पर उसकी मदद करने लगा। उसके नाम का इस्तेमाल लोला के पहचान दस्तावेजों में किया गया।पुलिस और एलआईयू अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किन लोगों ने उसकी मदद की और इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में उसकी पहचान कैसे दर्ज हो गई।

आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस ने बढ़ाई जांच

2025 में हुई जांच के दौरान लोला के नाम से भारतीय दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके नाम से ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी हुआ था, जिसकी वैधता 2035 तक बताई गई थी।इसके बाद पुलिस और एलआईयू ने यह जांच शुरू की कि एक विदेशी नागरिक के लिए भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर चूक हुई।जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि क्या इसी नेटवर्क से जुड़ी अन्य विदेशी महिलाओं के भी फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे दस्तावेज तैयार कराए गए थे।

प्लास्टिक सर्जन की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस पूरे मामले में एक डॉक्टर और प्लास्टिक सर्जन की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर आई थी। 2025 की जांच में आरोप लगा था कि डॉक्टर ने विदेशी महिलाओं की पहचान और हुलिया बदलने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी की।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, होलीदा और निलोफर ने पूछताछ में बताया था कि लोला ने उन्हें एक डॉक्टर से मिलवाया था और उनकी प्लास्टिक सर्जरी कराई गई थी। मामले में यह भी जांच की गई कि डॉक्टर ने महिलाओं की पहचान और भारत में उनकी कानूनी स्थिति की पुष्टि किए बिना इलाज या सर्जरी की थी या नहीं।

पुलिस की नजर अब पूरे नेटवर्क पर

लोला की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और विदेश से महिलाओं को भारत लाने से लेकर लखनऊ में उनके ठहरने तक पूरी व्यवस्था कैसे संचालित होती थी।पुलिस विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश, उनके वीजा और पासपोर्ट रिकॉर्ड, ठहरने की जानकारी तथा कथित फर्जी पहचान दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।जांच एजेंसियां नेपाल और उज्बेकिस्तान से जुड़े संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

जून 2025 में हुई थी पहली बड़ी कार्रवाई

इस मामले की शुरुआत जून 2025 में हुई थी, जब लखनऊ में विदेशी नागरिकों के अवैध ठहरने और कथित देह व्यापार से जुड़ी जानकारी के बाद कार्रवाई की गई थी। एक अपार्टमेंट से होलीदा और निलोफर को पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान दोनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को लोला और उसके कथित नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिले।उस समय से लोला जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम कड़ी बनी हुई थी।लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

पुलिस की कार्रवाई से सामने आया बड़ा नेटवर्क

लोला कायूमोवा की गिरफ्तारी को लखनऊ पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। करीब एक साल से फरार चल रही आरोपी तक पहुंचने के बाद अब जांच एजेंसियों का फोकस उसके संपर्कों और नेटवर्क पर है।हालांकि, मामले में लगाए गए कई आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और अदालत में साबित होना बाकी है। पुलिस की आगे की जांच और पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि फर्जी पहचान, बदले हुए हुलिए और विदेशी नेटवर्क के सहारे लंबे समय तक पुलिस से बचती रही लोला के पीछे कौन-कौन लोग थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क की अगली कड़ियों तक पहुंचने की उम्मीद है।

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