शैक्षणिक सत्र 2026- 2027 से सत्र 2029- 2030 तक प्रभावी रहेगी
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा कला एवं संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कला कुंज, 2/170, विवेक खण्ड-2, गोमती नगर, लखनऊ गायन वादन एवं नृत्य के विभिन्न विषयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण एवं अध्ययन संचालित करने हेतु अस्थाई मान्यता प्रदान की गई है। यह मान्यता विश्वविद्यालय के निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप प्रदान की गई है, जो शैक्षणिक सत्र 2026- 2027 से सत्र 2029- 2030 तक प्रभावी रहेगी। इस मान्यता से संस्थान में संगीत, नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक विधाओं के व्यवस्थित शिक्षण-प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। निदेशक अर्चा अग्रवाल के नेतृत्व में संचालित कला कुंज को निम्नलिखित पाठ्यक्रमों एवं विषयों के संचालन की अनुमति प्रदान की गई है द्विवर्षीय डिप्लोमा, गायन-प्रवेशिका एवं परिचय—शास्त्रीय गायन, स्वरवाद्य-प्रवेशिका एवं परिचय—सितार, गिटार, वायलिन एवं बाँसुरी, तालवाद्य-प्रवेशिका एवं परिचय—तबला, नृत्य-प्रवेशिका एवं परिचय—कथक, भरतनाट्यम। विशिष्ट कार्यक्रम के अंतर्गत 1 वर्षीय डिप्लोमा- ढ़ोलक, लोक संगीत, 2 वर्षीय डिप्लोमा– सुगम संगीत, 6 माह सर्टीफिकेट कोर्स– की-बोर्ड, गिटार-स्पेनिश। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने इस अवसर पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण कला शिक्षा का व्यापक प्रसार करना तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक विधाओं के अध्ययन से जोड़ना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला एवं संस्कृति को शिक्षा की मूल धारा से जोड़कर विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना विकसित की गई है । उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कला कुंज जैसे संस्थान न केवल कला शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देंगे, बल्कि समाज को विश्वविद्यालयीन शिक्षा व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उल्लेखनीय है कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित राज्य विश्वविद्यालय है, जो संस्कृति व कला-विषय के डिग्री डिप्लोमा में उच्च शिक्षा एवं शोध कार्यक्रम संचालित करता है।





