अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस के हाथ एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा सबूत लगा है। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर छापेमारी कर लकड़ी का एक दानपात्र बरामद किया है, जिस पर ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बक्से पर डिजिटल पेमेंट के लिए बकायदा एक क्यूआर कोड भी लगा हुआ था, जिसके जरिए श्रद्धालुओं से अवैध रूप से सीधे डिजिटल भुगतान के माध्यम से दान लिया जा रहा था। पुलिस अब इस बरामद क्यूआर कोड से जुड़े बैंक खातों की कड़ियों को खंगाल रही है ताकि डिजिटल माध्यम से की गई अवैध उगाही के पूरे मनी ट्रेल का पर्दाफाश किया जा सके।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच तेज होने के साथ ही इस पूरे सिंडिकेट के काम करने के तरीके को लेकर कई और बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस की पूछताछ में आरोपी अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया है कि वे लोग मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन से अच्छी तरह वाकिफ थे और इसी का फायदा उठाकर कैमरों की नजर से बचते हुए चोरी की रकम को पहले मंदिर के प्रसाधन गृह (वॉशरुम) में छुपा देते थे, जिसे बाद में मौका मिलते ही बाहर निकाल लिया जाता था। इस पूरे खेल में दानपात्र की मोजणी (गिनती) प्रक्रिया की खामियों और ट्रस्ट के कुछ करीबियों व बैंक कर्मचारियों के पास रहने वाली चाबियों का भी कथित दुरुपयोग किया गया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने और जांच की आंच बढ़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। मामले में अब तक मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और चंपत राय के पूर्व ड्राइवर तिन्नू यादव सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी और पुलिस की टीमें अब पकड़े गए आरोपियों से मिली जानकारियों के आधार पर इस घोटाले से जुड़े अन्य नेटवर्क और अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों का पता लगाने में जुटी हुई हैं।





