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बेकाबू हो सकता है कोरोना

भारत में कोरोना संक्रमण का पहला केस जनवरी में केरल में सामने आया था और तभी से सावधानी का सिलसिला शुरू हो गया था। यही कारण है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार बहुत धीमी रही। जनवरी में मामला सामने आने के बाद फरवरी माह तक कोई संकट देश में नहीं था, लेकिन मार्च के प्रथम सप्ताह में जब हर दिन कोरोना के मामले सामने आने लगे तो देश में सतर्कता भी बढ़ायी गयी, मॉल, स्कूल, सिनेमा हाल बंद किये जाने लगे और 25 मार्च को तो सीधे तीन सप्ताह का लॉकडाउन लागू कर दिया गया।

सरकार के सख्त कदमों से कोरोना की रफ्तार थमी रही और इस बीच बड़े पैमाने पर तैयारियां की गयीं। कोरोना से लड़ने के लिए आवश्यक साजो-सामान, कोरेन्टाइन सेंटर और आइसोलेशन बेड विकसित करने का काम तेजी के साथ किया गया जिससे देश कोरोना से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया। तैयारी का ही नतीजा है कि कोरोना के मामले इटली, इंग्लैंड, स्पेन जैसे देशों से अधिक हो गये हैं लेकिन हालत उतनी खराब नहीं हुई जितना इटली या स्पेन में देखने को मिली।

उत्तर प्रदेश या कहें संपूर्ण उत्तर भारत में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत अच्छी नहीं हैं इसके बावजूद अगर कोरोना बेकाबू नहीं हुआ तो इसके पीछे लॉकडाउन और इसे कड़ाई से लागू करने की सरकार की नीति रही है। लेकिन एक जून के बाद जबसे अनलॉक 1.0 की शु शुरूआत हुई है तबसे स्थिति बिगड़ने लगी है। इसका कारण लापरवाही और प्रवासी श्रमिकों की वापसी है। प्रवासी श्रमिक बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित पाये जा रहे हैं।

हालांकि यह बहुत चिंता की बात नहीं है क्योंकि इनको कोरेन्टाइन कर निगरानी रखी जा रही है, लेकिन अनलॉक होने के बाद लोग लापरवाह हो गये हैं। मार्च में लॉकडाउन लागू होने के कारण दो-तीन माह तक जो शादी, मुंडन, तिलक या गौना आदि रुक गया था उसने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। हर गांव में चार-छह शादियां ठन गयी हैं और इनमें बड़े पैमाने पर जमावड़े हो रहे हैं। अनुमति लेकर शादी करने की इजाजत है लेकिन इसमें 50 लोग ही शामिल हो सकते हैं, लेकिन न तो कोई अनुमति लेने जा रहा है और न ही 50 की संख्या का कोई ध्यान रखता है।

बिना मॉस्क, ग्लब्स के, बिना सफाई सेनेटाइजेशन के शादियों में सैकड़ों लोगों की जमघट हो रही है। यह कोरोना विस्फोट का बड़ा कारण बन सकता है। कोरोना को लेकर लापरवाही हर तरफ नजर आती है। राशन की दुकानों पर लंबी लाइनें लगती हैं और यह पूरे महीने लगी रहती हैं। कारण की सरकार महीने मे दो बार राशन दे रही है और राशन डीलर राशन हजम करने के लिए बांटने में कोताही करते हैं जिससे लाइनें लगी ही रहती हैं।

उत्तर प्रदेश कोरोना से अभी तक ठीक से लड़ा है और इसकी तारीफ भी सब जगह हो रही है। अगर कोरोना को लेकर लापरवाही होती रही, बड़े पैमाने पर शादियां एवं जमावड़े होते रहे, तो यह बेकाबू हो जायेगा। सरकार को तुरन्त हस्तक्षेप कर शादियों की संख्या और उपस्थिति को सीमित करना चाहिए अन्यथा कोरोना बेकाबू हो जायेगा।

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