लखनऊ, विशेष संवाददाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए न रोजगार था और न पारदर्शी भर्ती प्रणाली। सरकारी नौकरियों पर एक परिवार का अधिकार था और बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकार की सोच व कार्यशैली बीमार थी। 2017 से पहले तत्कालीन राज्य सरकार ही प्रदेश की सबसे बड़ी अपशगुन थी। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि सवा तीन करोड़ से अधिक युवा व कारीगर रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े हैं।
मुख्यमंत्री बुधवार को विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, प्रशिक्षित युवाओं से संवाद किया और उनके उत्पादों की सराहना की। सीएम ने कहा कि इस वर्ष यूनेस्को ने विश्व युवा कौशल दिवस की थीम “साझा भविष्य के लिए कौशल” निर्धारित की है। अवसर तभी साकार होते हैं, जब दूरदृष्टि और सकारात्मक सोच वाली सरकार हो। दुनिया का सबसे अधिक युवा वर्ग उत्तर प्रदेश में है और यह गर्व का विषय है। यह हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। हम इस स्केल को स्किलिंग से जोड़कर यूपी की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। युवा शक्ति किसी भी चुनौती का समाधान बन सकती है।
युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण व अवसर मिलें तो वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों ने ऐसे हालात बना दिए कि बाहर के लोग यूपी के नाम से चिढ़ते थे। कोई युवा डिप्लोमा या डिग्री लेकर प्रदेश से बाहर जाता था तो उसे अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सरकारी नौकरियों पर एक खानदान का अधिकार था, पारदर्शिता का अभाव था। भर्ती प्रक्रियाओं में भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार हावी था। बिना पैसे कोई काम नहीं होता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धन्ना सेठ हो या झोपड़ी में रहने वाला इंसान, रोटी केवल दो ही खाता है। जिसके पास सीमित आवश्यकता है, उसको नींद अच्छी आती है। जिसके पास चोरी का पैसा होगा, वह ठीक से सो भी नहीं पाता। उसके लिए तो जीवन नर्क से बदतर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पहली बार देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन कर स्किल डेवलपमेंट को नई पहचान और दिशा दी। इसे युवाओं के रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाया गया है। करीब 10 वर्ष पहले यहां मौजूद अधिसंख्य युवा छात्र थे और माता-पिता पर निर्भर थे। तब प्रदेश की स्थिति बेहद खराब थी। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। स्कूल शिक्षा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी और युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।
कानून-व्यवस्था की स्थिति भी कमजोर थी। न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी और न ही आम नागरिक। प्रदेश के पास प्रतिभाशाली युवा और मेहनती अन्नदाता किसान जैसी अमूल्य शक्तियां भी हैं। उत्तर प्रदेश कभी बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की सोच और कार्यशैली बीमारू मानसिकता का प्रतीक थी। जो सरकार अपने युवाओं की उपेक्षा करे, कारीगरों को पलायन के लिए मजबूर करे और अन्नदाता किसानों का सम्मान न करे, ऐसी व्यवस्था जनता के हित में नहीं हो सकती।
ब्रह्मोस प्रोजेक्ट से आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके 500 युवाओं को रोजगार मिला। इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, कानपुर, बदायूं, बरेली, गोरखपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा और अयोध्या समेत कई जिलों के युवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई युवा जापान या किसी अन्य देश में रोजगार करना चाहता है तो उसे संबंधित देश की भाषा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और रोजगार उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा। सीएम योगी ने कार्यक्रम में उपस्थित एक युवती का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 27 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अपने दम पर अर्जित कर रही है और अपनी मां का उपचार करा रही है। यही वास्तविक स्वावलंबन है। यह 27000 रुपये कई लाख पर भारी हैं। उन्होंने उस युवती की मां के उपचार में हरसंभव सरकारी सहायता देने का आश्वासन दिया।
सीएम योगी ने 11 युवाओं को किया सम्मानित
विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं आईटीआई से प्रशिक्षित 11 युवाओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास ही आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था का अभाव था, जबकि पिछले नौ वर्षों में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां और सवा तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ा गया है। उन्होंने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सम्मानित युवाओं ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। बरेली की राजरानी ने बताया कि कौशल प्रशिक्षण के बाद मिली नौकरी से वह कैंसर पीड़ित मां का इलाज करा रही हैं। शुभ्रा मिश्रा आज अपना उद्यम चलाकर लाखों रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, जबकि ज्ञान प्रकाश वर्मा ने हेल्थकेयर स्टार्टअप शुरू कर युवाओं को रोजगार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में अब एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उत्तर प्रदेश के युवा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।





