लखनऊ। भारतेन्दु नाट्य अकादमी की ओर से अतुल सत्य कौशिक कृत नाटक ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ का मंचन बीएनए के सभागार में किया गया। नाटक का निर्देशन अतुल सत्य कौशिक ने किया। ‘छत्रपति शिवाजी महाराज केवल छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की कथा नहीं, बल्कि उस विचार की रंगमंचीय यात्रा है जिसने स्वाभिमान, स्वराज्य और राष्ट्रधर्म को एक नई परिभाषा दी।
यह महानाट्य शिवाजी के व्यक्तित्व को केवल एक अद्वितीय योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी शासक, संवेदनशील पुत्र, कुशल रणनीतिकार और जननायक के रूप में प्रस्तुत करता है। कथा उनके जीवन के उन निर्णायक प्रसंगों से होकर गुजरती है जहाँ व्यक्तिगत सुख और राष्ट्रधर्म आमने-सामने खड़े होते हैं, जहाँ मातृभूमि के लिए त्याग, साथियों की निष्ठा और असंख्य वीरों का बलिदान स्वराज्य की नींव बनता है। जीजाबाई की तपस्या से लेकर रणभूमि की गर्जना तक, मित्रों और सेनानायकों के बलिदान से लेकर शत्रुओं के साथ हुए निर्णायक संघर्षों तक, हर प्रसंग शिवाजी के विराट व्यक्तित्व की एक नई परत खोलता है। भव्य दृश्य संरचना, विशाल रंगमंचीय कैनवास, युद्ध और दरबार के प्रभावशाली दृश्य, नृत्य, प्रकाश, वेशभूषा और विशेष रूप से रचित मौलिक संगीत इस प्रस्तुति को एक जीवंत ऐतिहासिक अनुभव में बदलते हैं।
प्रस्तुति पर अतुल सत्य कौशिक की विशिष्ट रंग-शैली की स्पष्ट छाप है- तेज गति वाली कथा, भावनात्मक तीव्रता, प्रभावशाली संवाद, विराट मंचीय बिंब और इतिहास को समकालीन चेतना से जोड़ने की क्षमता। ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ अंतत: वीरता, राष्ट्रप्रेम, नेतृत्व और बलिदान की ऐसी गाथा है जो दर्शक के भीतर गौरव के साथ-साथ कर्तव्य का भाव भी जगाती है। नाटक में अहम भूमिका प्रदीप शिवहरे, धीरज कुमार, श्रुतिकीर्ति सिंह, वैष्णवी सेठ, शिवा सक्सेना, अंशु साहू, भावना द्विवेदी, अनिल चौधरी, सामनाथ शर्मा, तुषार, रितेश, अर्ध्य, अमित कुमार वर्मा, आशुतोष जयसवाल, राजश्री, मयंक तिवारी, अलोक कुमार यादव, शरद राज सिंह ने निभायी।





