सदन में 117 प्रश्न पूछे गए, 446 शून्यकाल उल्लेख और 207 विशेष उल्लेख किए गए।
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का समापन शनिवार को हो गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि सत्र के दौरान कुल 31 बैठकें हुईं और सदन की कार्यवाही 151 घंटे 42 मिनट तक चली। इस दौरान सदन की उत्पादकता 93 प्रतिशत रही।इस सत्र की शुरुआत द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई थी। सत्र में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
महिला आरक्षण विधेयक अटका
महिला आरक्षण से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ लोकसभा में पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो पाया।
इस विधेयक को पारित कराने के उद्देश्य से सत्र को 2 अप्रैल के बाद बढ़ाकर 16 से 18 अप्रैल तक विशेष बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
बजट सत्र के दौरान कुल 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और जन विश्वास (संशोधन) विधेयक प्रमुख रहे।
राज्यसभा में 109% से अधिक उत्पादकता
राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने बताया कि उच्च सदन में कुल 157 घंटे 40 मिनट कामकाज हुआ और उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही। सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और केंद्रीय बजट 2026-27 पर चार-चार दिन चर्चा हुई। इन चर्चाओं में क्रमशः 79 और 97 सदस्यों ने भाग लिया। इसके अलावा सदन में 117 प्रश्न पूछे गए, 446 शून्यकाल उल्लेख और 207 विशेष उल्लेख किए गए।
अन्य प्रमुख घटनाएं
- हरिवंश उपसभापति निर्विरोध चुने गए
- 50 निजी विधेयक पेश हुए
- 12 क्षेत्रीय भाषाओं में सदस्यों ने अपने विचार रखे
संसद का यह बजट सत्र विधायी कार्य और चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, हालांकि महिला आरक्षण विधेयक का पारित न होना इसकी सबसे बड़ी राजनीतिक घटना माना जा रहा है।





